सरकारी स्कूलों में नहीं पहुंची किताबें
शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजब गजब हैं। पिछले साल जहां शिक्षा सत्र की समाप्ति तक छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकों के लिए इंतजार करना पड़ा। वहीं, इस साल नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो महीने बाद भी छात्रों को शत प्रतिशत पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाई है।
विभाग की ओर से सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में कक्षा एक से 12वीं तक छात्र-छात्राओं को शिक्षा सत्र की शुरुआत में पाठ्य पुस्तकें मिल जानी चाहिए थी, लेकिन हाल यह है कि अब तक आधी अधूरी पाठ्य पुस्तकें हीं मिल पाई हैं। खासकर अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के छात्र कई विषयों की पाठ्य पुस्तकों के इंतजार में हैं। देहरादून के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में कक्षा नौ में अंग्रेजी की दो में से एक भी पुस्तक नहीं मिली।
यही हाल विज्ञान की पुस्तक का है। 10वीं में विज्ञान, 11वीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, 12वीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान की अब तक एक भी पाठ्य पुस्तक नहीं मिली, जिससे दूरदराज के पर्वतीय जिलों में पाठ्य पुस्तकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इन विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक, 12वीं में भूगोल की तीन पाठ्य पुस्तकें हैं।
तीन में से दो पुस्तकें मिली हैं, जो एक पुस्तक मिली है, वह भी कम मिली है। इसी तरह गणित में दो में से एक पुस्तक मिली है। जो मिली है, उसमें छात्र अधिक हैं और पाठ्य पुस्तकें कम हैं। अर्थशास्त्र में दो में से एक पुस्तक मिली है। शिक्षकों के मुताबिक, पिछले साल छात्र-छात्राओं की पुरानी पाठ्य पुस्तकें जमा कराई गई थी। जो पर्याप्त नहीं हैं, जैसे तैसे उसी से काम चलाया जा रहा है।
प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों में भी छात्र-छात्राओं को अब तक शत-प्रतिशत पाठ्य पुस्तकें नहीं मिली हैं। पिछले साल की पुरानी किताबों से काम चलाया जा रहा है। -स्वतंत्र मिश्रा, प्रांतीय अध्यक्ष, उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ
ये भी पढ़ें...Chardham Yatra 2024: बड़ा अपडेट...वीआईपी दर्शन पर 10 जून तक रोक, मुख्य सचिव सभी राज्यों को भेजा पत्र
वेतन को लेकर ऊधमसिंह नगर से कुछ शिक्षक शिक्षा निदेशालय में मुझसे मिले थे, जिस विद्यालय का यह प्रकरण है उसमें प्रबंधन समिति के गठन को लेकर विवाद चला आ रहा है। अफसरों से कहा गया कि वेतन के लिए विद्यालय एक्ट में देखकर प्रकरण के निपटारे का प्रयास करें। वहीं, कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को पाठ्य पुस्तकें मिल चुकी हैं। अब माध्यमिक विद्यालयों में इसे उपलब्ध कराया जा रहा है। -महावीर सिंह बिष्ट, शिक्षा निदेशक