उत्तराखंड में पर्यटन क्षेत्र में सरकार को और फोकस करने की जरूरत है। विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार और सुधार की चलाई योजनाओं में लाभार्थी संख्या कम है, हालांकि पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2002 के आंकड़ों की तुलना में वर्ष 2017 की पर्यटक संख्या में दो सौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। अगर धार्मिक पर्यटन की बीते वर्ष से तुलना की जाए तो विदेशी सैलानियों की आमद कम हुई है।
सरकार ने चार धाम यात्रा मार्ग पर आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए नौ करोड़ रुपये खर्च किया है। पर्यटन क्षेत्र को और विकसित करने के लिए चलाई जा रही योजनाएं उत्साह बढ़ाने वाली नहीं है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना के तहत इस वर्ष 99 लोगों ने नया रोजगार शुरू किया, जबकि आवेदन 6137 लोगों को प्राप्त हुआ।
इसके साथ पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए पांच हजार होम स्टे बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना में इस वर्ष केवल चार लाभार्थियों को लाभ दिया गया। वहीं इस योजना के तहत एकल ग्राम में केवल तीन गांव ही चयनित हुए हैं।
प्रदेश सरकार 2030 तक प्रदेश के प्रत्येक गांव की सड़कों को ऑलवेदर रोड में बदल देगी। उसने अगले 12 वर्ष में सार्वजनिक वाहनों का दायरा 70 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य बनाया है। यह खुलासा प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण में हुआ है। रिपोर्ट में परिवहन एवं संचार के क्षेत्र में राज्य की अब तक की प्रगति का आंकलन किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में इतनी तेजी से सड़कें नहीं बन रही हैं, जितनी तेजी से इस पर वाहनों की संख्या का दबाव बढ़ रहा है। पिछले एक साल के दौरान जहां गत वर्ष की तुलना में सड़कों की लंबाई की दर 3.97 प्रतिशत रही, जबकि सड़कों पर उतरने वाले नए वाहनों की संख्या की दर 12.07 फीसदी दर से बढ़ी है। प्रदेश में सड़कों की लंबाई 44,177 किमी है, जबकि सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या 26,73,759 हो गई है।
सरकार ने सतत विकास लक्ष्यों के आधार पर जो लक्ष्य तय किए हैं, उनके अनुसार, 2030 तक प्रति लाख जनसंख्या पर सड़कों की लंबाई 322.93 की तुलना में 461.29 किमी किया जाएगा। 2016-17 तक 67.86 गांवों की सड़कें सर्वऋतु हैं। 2030 तक प्रदेश के हर गांव की सड़क ऑलवेदर हो जाएगी। 2016-17 में सार्वजनिक परिवहन सुविधा कवरेज की दर महज 10 फीसदी थी, जिसे अगले 12 साल में 70 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
तथ्यों की नजर में
-566.04 किमी नई सड़कों का निर्माण किया लोनिवि ने
-43 नए पुलों का भी निर्माण पूरा, 70 पर काम जारी
-12266 गांवों को अब तक पक्की सड़कों से जोड़ा
-12359 गांवों को 31 मार्च 2019 तक जोड़ने का लक्ष्य
-383 किमी सड़क पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई
34.32 करोड़ पहुंचा परिवहन निगम का घाटा
उत्तराखंड परिवहन निगम का कुल राजस्व घाटा बढ़कर 34 करोड़ 32 लाख रुपये हो गया है। पिछले साल ये 23.01 करोड़ रुपये था। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर दिसंबर तक निगम ने 36.19 करोड़ रुपये की कमाई की और उसका कुल खर्च 39.63 करोड़ रुपये रहा। 2003-04 में निगम का कुल घाटा महज 10.87 करोड़ रुपये था, जोे 16 साल में तीन गुने से भी अधिक हो गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि निगम की बसों के लोड फैक्टर में सुधार की वजह से प्रति बस की रोजना की आय 9465 रुपये हो गई है, जबकि पिछले साल प्रत्येक बस 8704 रुपये की कमाई हो रही थी।
जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश सरकार का 24 प्रतिशत राजस्व बढ़ा है। जीएसटी के दायरे से बाहर पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, नेचुरल गैस लगने वाले टैक्स से प्राप्त राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि 30 नवंबर 2019 तक आबकारी से 1934.09 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर 2018 तक जीएसटी से कुल 5105.18 करोड़ (प्रतिकर सहित) का राजस्व प्राप्त हुआ। जो पिछले साल की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में गत वर्ष कुल 4118.10 करोड़ राजस्व सरकार को मिला था। जीएसटी दायरे से बाहर रखे गए पेट्रोल, डीजल, नेचुरल गैस से दिसंबर 2018 तक 1348.62 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ।
इसमें भी नौ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। स्टांप शुल्क व जमीनों की रजिस्ट्री शुल्क से भी सरकार की कमाई 26.25 प्रतिशत बढ़ी है। इसमें 769.64 करोड़ का राजस्व मिला। सरकार के लिए आबकारी विभाग राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है। निर्धारित वार्षिक लक्ष्य 2650 करोड़ की तुलना में 20 नवंबर 2018 तक 1934 करोड़ का राजस्व एकत्रित किया गया। राज्य के कुल राजस्व का 18 से 19 प्रतिशत अकेले आबकारी विभाग से प्राप्त होता है।