पूरी दुनिया को हिला देने वाली उत्तराखंड त्रासदी को बीते 369 दिन पूरे हो गए हैं। लेकिन इस आपदा में बरामद 631 कंकालों में से किसी का अब तक वारिस नहीं मिला है।
अब तक सिर्फ दस प्रतिशत के परिजनों ने अपने सैंपल दिए हैं, जबकि बाकी के दावेदार सामने नहीं आए हैं। उधर, हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला भेजे गए डीएनए सैंपलों की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है।
केदारनाथ आपदा में मौत का आंकड़ा 631 तक पहुंच गया हैं। इनमें से 49 कंकाल इस साल सर्च आपरेशन में बरामद हुए हैं। इन सभी का डीएनए सैंपल लिया गया था।
डीएनए सैंपल लेना बेकार
उम्मीद थी कि सैंपल लेने के बाद वारिस होने का दावा करने वाले लोग अपनों की तलाश में आएंगे, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
सरकार और पुलिस स्तर पर डीएनए सैंपल मिलान के लिए परिजनों के खून के सैंपल लेने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। ऐसे में शवों के डीएनए सैंपल लेना बेकार साबित हो रहा है।
सूत्रों की मानें तो एक साल बाद भी सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों के ही खून के सैंपल हैदराबाद प्रयोगशाला भेजे जा सके हैं। लेकिन वहां से भी मिलान की रिपोर्ट अब तक नहीं मिल सकी है। ऐसे में केदारघाटी में जान गवांने वाले 631 लोग लावारिस बनकर रह गए हैं।
केदारघाटी में 7 और मानव कंकाल मिले
केदारनाथ पैदल मार्ग के समीप पहाड़ी पर एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को और सात मानव कंकाल मिले हैं। एसटीएफ ने डीएनए सैंपल लेने के बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया है।
एसटीएफ के चीफ डीआईजी जीएस मर्तोलिया ने बताया कि बृहस्पतिवार को टीम को पांच कंकाल घिनुरपाणी के ऊपर और दो कंकाल गौरीगांव के ऊपर खर्क में मिले। पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह ने बताया कि 11 जून से अब तक 46 मानव कंकाल केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच मिल चुके हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के आलाधिकारियों के साथ दिल्ली केएम्स में हुई बैठक में निर्देश दिया है कि शवों को खोजने का काम जारी रखा जाए। इस काम में कतई लापरवाही न की जाए।
सैंपल का मकसद
अज्ञात शवों का डीएनए सैंपल लेने के पीछे मकसद यह होता है कि भविष्य में यदि कोई शव पर अपने परिजन होने का दावा करे तो वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि की जा सके। दावेदार के खून के सैंपल लेकर उसका डीएनए सैंपल से मिलान कराया जाता है।
आपदा में मरे लोगों के डीएनए सैंपल प्रिजर्व किए गए थे, लेकिन अधिकांश शवों के लिए किसी ने दावेदारी नहीं की। सिर्फ दस प्रतिशत लोगों ने इसमें रुचि दिखाई, जिनके खून के सैंपल डीएनए से मिलान के लिए हैदराबाद प्रयोगशाला भेजे गए थे। अभी लैब की रिपोर्ट नहीं मिली है।
-अमित सिन्हा, डीआईजी गढवाल परिक्षेत्र
डीएनए सैंपल का भविष्य तापमान पर निर्भर करता हैं। सैंपल संरक्षित करने में कई सावधानी रखनी पड़ती हैं। फ्रिजर में मानक का ख्याल न रखा गया तो सैंपल खराब हो जाता है। हड्डी और दांतों के सैंपल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। केदारघाटी में इनसे ही सैंपल लिए गए थे।
-डा. एमके अग्रवाल, वैज्ञानिक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला, देहरादून