समय से सूचना न उपलब्ध कराने पर उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने डीजीपी बीएस सिद्धू को तलब किया है।
आयोग ने पुलिस मुख्यालय से राज्य स्थापना से लेकर अब तक 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के जिलेवार आंकड़े मांगे थे।
इस संबंध में आयोग ने एक साल में पुलिस मुख्यालय को कई रिमाइंडर दिए। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने सख्ती दिखाते हुए 24 फरवरी को दोपहर 12 बजे डीजीपी को आयोग के समक्ष पेश होने के कहा है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने बताया कि आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए पहले मुख्यालय को पंद्रह दिन और फिर 7 दिन का समय दिया गया।
कई बार रिमाइंडर देते हुए एक साल बीत गया। मुख्यालय स्तर से इस मामले में सूचना तो दूर, आयोग को यह तक सूचित नहीं किया गया कि आपके कार्यालय से इस संबंध में कार्रवाई के लिए अधीनस्थ पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नहीं।
इस मामले में लगातार सुस्ती बरती गई। लिहाजा अब 24 फरवरी को डीजीपी को आयोग के समक्ष पेश होने को कहा गया है।
ये हैं आयोग के अधिकार
बाल अधिकारों का उल्लंघन होने पर, बाल संरक्षण कानूनों को लागू नहीं किए जाने आदि पर आयोग किसी भी व्यक्ति को तलब करना, पेश होने के लिए बाध्य करना, शपथपूर्ण पूछताछ करना, किसी भी दस्तावेज को हासिल करना, किसी भी अदालत या कार्यालय से सार्वजनिक दस्तावेज को मंगवाना, गवाह या दस्तावेज की पड़ताल के लिए आदेश देना आदि कार्रर्वाई राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग कर सकता है।