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उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड: पंडा पुरोहित और हक हकूकधारी एक बार फिर मुखर, पूर्व की व्यवस्थाओं को लागू करने की मांग

Wed, 02 Jun 2021 11:59 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड को लेकर हक हकूकधारियो का कहना है कि सरकार को बोर्ड को तत्काल भंग कर पूर्व की व्यवस्थाओं को लागू करना चाहिए। 
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चारधाम - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड को लेकर पंडा पुरोहित और हक हकूकधारी एक बार फिर मुखर हैं। वे इसे अपने अधिकारों के साथ धामों की संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को देवस्थानम बोर्ड को तत्काल भंग कर पूर्व की व्यवस्थाओं को लागू करना चाहिए। अमर उजाला ने इन इस मुद्दे पर आंदोलन चला रहे लोगों से बातचीत की।

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उत्तराखंड में कोरोना: हालात सामान्य होने पर शुरू होगी चारधाम यात्रा- सतपाल महाराज

उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड को तिरुपति बालाजी, साईं ट्रस्ट एवं वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को आधार बनाकर बनाया गया है। यह सभी केवल एक-एक मंदिर का प्रबंधन व संचालन करते हैं। जबकि यहां देवस्थानम बोर्ड में 51 मंदिरों को रखा गया है। चारों धामों की पूजा परंपराएं, पुजारी, रावल और हक हकूकधारी अलग-अलग हैं। ऐसे में एक ही बोर्ड द्वारा चारों धामों के अलावा 47 अन्य मंदिरों का संचालन एवं प्रबंधन किया जाना तर्कसंगत नहीं है।
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- डॉ. बृजेश सती, प्रवक्ता ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत, बदरीनाथ धाम

हमारी एक सूत्रीय मांग है, देवस्थानम बोर्ड को तुरंत भंग किया जाए। राज्य सरकार द्वारा देवस्थानम बोर्ड बनाने से पहले चार धामों के तीर्थ पुरोहितों व इन मंदिरों से जुड़े हक हकूकधारियों को विश्वास में नहीं लिया गया।
- सुरेश सेमवाल, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष

पंडा महासभा यमुनोत्री देवस्थानम बोर्ड का बहिष्कार करती है। ये अव्यवहारिक है। बोर्ड में अफसरों की दखलअंदाजी है, जिससे आए दिन बोर्ड चर्चाओं में है। बोर्ड के अस्तित्व में आने के बाद से चारों धामों की परंपराओं के साथ खिलवाड़ किया गया। पिछले वर्ष मंदिर के कपाट खुलने की तिथि में परिवर्तन किया गया, जबकि इस वर्ष भगवान की अभिषेक एवं पूजा के समय में बदलाव कर दिया गया, जो सही नहीं है।
- कृतेशवर उनियाल, यमुनोत्री मंदिर समिति के महासचिव 

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को अपनी घोषणा के मुताबिक शीघ्र ही देवस्थानम बोर्ड को समाप्त कर पूर्व स्थिति बहाल करनी चाहिए। इसी में सबको हित है। चारों धाम हमारी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े हैं, इनके नियमों और परंपराओं में छेड़छाड़ की जानी ठीक नहीं है।
- विनोद शुक्ला, केदारनाथ तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष

देवस्थानम बोर्ड का मुद्दा उत्तराखंड के लिए धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक, हर दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। तीर्थस्थलों को लेकर हमारी प्राचीन परंपराएं बरकरार रहनी चाहिए। साथ ही तीर्थपुरोहितों और स्थानीय हक-हकूकधारियों के अधिकारों की रक्षा और भावनाओं का भी पूरा सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे का समाधान सभी पक्षों के साथ बातचीत कर निकाला जाना चाहिए। ये बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इस पर एक तरफा फैसला लेना जल्दबाजी होगा। सरकार को चाहिए कि वे समय रहते पंडा, पुरोहितों और हक हककूधारियों को साथ बैठाए और बीच का रास्ता निकालते हुए इस मसले को हल करे। 
- कर्नल अजय कोठियाल (रि.), आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता

उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019 इस वक्त राज्य में लागू है। बोर्ड की स्थापना के बाद से ही अब तक अगर इसका विरोध किया जा रहा है तो सरकार को देखना चाहिए कि इसमें कुछ तो गड़बड़ है। इसलिए अच्छा होगा कि सरकार इससे जुड़े लोगों के अधिकारों को संरक्षित करते बीच का कोई रास्ता निकाले। पंडा, पुरोहितों और हक हककूधारियों के अधिकारों में कटौती नहीं की जानी चाहिए। साथ ही इसमें यह भी देखना पड़ेगा कि इससे तीर्थ यात्रा पर आने वाले यात्रियों को कितना फायदा हो रहा है। 
- एस एस पांगती, रिटायर्ड आईएएस

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित प्राचीन परंपराएं खंडित कर रहा बोर्ड : महापंचायत

देवस्थानम बोर्ड को भंग किए जाने की एक सूत्री मांग को लेकर देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत के सदस्य एक बार फिर मुखर हैं। महापंचायत से जुड़े सदस्यों का साफ कहना है कि 15 जनवरी 2020 को बोर्ड की अधिसूचना जारी होने के बाद देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद से अब तक सरकार के पास बताने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है।

देवस्थानम बोर्ड की ओर से स्थापना के बाद से ही चारों धामों की परंपराओं के साथ सिर्फ खिलवाड़ किया जा रहा है। देवस्थानम बोर्ड के गठन के 40 दिन बाद मुख्य कार्य अधिकारी नियुक्त किया गया। 24 फरवरी 2021 को रविनाथ रमन को सीईओ पद पर अतिरिक्त प्रभार दिया गया। यह नियुक्ति उस दिन की गई, जिस दिन उच्च न्यायालय में सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर देवस्थानम बोर्ड को भंग करने संबंधित याचिका पर सुनवाई हो रही थी।

देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत के प्रतिनिधियों का आरोप है कि देवस्थानम बोर्ड स्थापना के बाद से ही चारों धामों की परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत बदरीनाथ धाम के प्रवक्ता डॉ.बृजेश सती का आरोप है कि विगत वर्ष बदरीनाथ मंदिर के कपाट 30 अप्रैल को खोलने का मुहूर्त तय किया गया था, लेकिन बोर्ड द्वारा समय पर बदरीनाथ मंदिर के रावल को केरल से धाम नहीं लाया गया, जिसके कारण इतिहास में पहली बार बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि परिवर्तित की गई और 15 मई को कपाट खुले।

इस वर्ष भी देवस्थानम बोर्ड ने कोरोना गाइडलाइन के तहत एसओपी जारी की, जिसके तहत प्रात: 7:00 बजे से 7:30 बजे तक पूजा अभिषेक किए जाने का निर्देश दिया गया। इससे आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित प्राचीन परंपरा खंडित हुई। नियमानुसार भगवान बदरीनाथ जी का ब्रह्म मुहूर्त में अभिषेक किया जाता है। इसके बाद मंगल आरती की जाती है। यह प्रक्रिया ब्रह्म मुहूर्त में 4:30 बजे से प्रारंभ हो जाती है, लेकिन इस वर्ष 18 मई से 30 मई तक कोरोना एसओपी के तहत 7:00 बजे से 7:30 बजे तक अभिषेक एवं पूजा आरती की गई।

हाई पावर कमेटी की अब तक नहीं हुई एक भी बैठक
देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत के प्रतिनिधियों का आरोप है कि देवस्थानम बोर्ड के आईएएस अधिकारियों की हाई पावर कमेटी की अब तक एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई। न ही अभी तक देवस्थानम बोर्ड का स्थायी सीईओ नियुक्त किया गया है। देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने केदारनाथ धाम में पुजारी आवासों के निर्माण का मुद्दा भी उठाया है। नई केदारपुरी में पुजारियों के आवासों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना था, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक अधर में लटका है। इसके अलावा पंच केदार में से तृतीय केदार मद्धमहेश्वर मंदिर की ऊपरी इलाके से हो रहे भूक्षरण से भी मंदिर एवं उसके आसपास के इलाके को खतरा उत्पन्न हो गया है। इस ओर भी देवस्थानम बोर्ड का ध्यान नहीं है।

भंग करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पांच याचिकाएं
देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पांच याचिकाएं दायर की गई हैं। इसमें से एक याचिका सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 17 सितंबर 2020 को दाखिल की गई थी। इसके अलावा ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति की ओर से भी एक याचिका दायर की गई है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति की ओर से सुरेश सेमवाल व दीपक सेमवाल की ओर से याचिका दायर की गई है। इसके अलावा दो अन्य याचिकाएं भी अलग-अलग दाखिल की गई हैं। सभी याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।
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अवस्थापना विकास और बेहतर सुविधाएं देेना है मकसद

प्रदेश के प्रसिद्ध चारों धामों को सुनियोजित अवस्थापना विकास और देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा व सुरक्षा मुहैया कराने के मकसद से सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन किया है। सरकार का मानना है कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की तादाद तेजी से बढ़ रही है। देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से आगामी सालों में श्रद्धालुओं की संख्या को देख कर अवस्थापना विकास और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बोर्ड के गठन से तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज और हकहकूकधारियों के हित प्रभावित नहीं होंगे और न ही धार्मिक परंपरा के साथ छेड़छाड़ किया जाएगा।

प्रदेश में तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वैष्णो माता साइन बोर्ड की तर्ज पर चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया है। दिसंबर 2019 में देवस्थानम बोर्ड अधिनियम विधानसभा में पारित किया गया था। जनवरी 2020 में सरकार ने बोर्ड का गठन किया था। 22 मई 2020 को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बोर्ड की पहली बैठक हुई थी। जिसमें बोर्ड को 10 करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया गया था।

देवस्थानम बोर्ड बनाने के पीछे सरकार की मंशा थी कि केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम में तीर्थ यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अवस्थापना विकास हो। साथ ही दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा के साथ ही बेहतर सुविधाएं मिल सकें। बोर्ड के गठन को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने विरोध किया था। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने देवस्थानम बोर्ड बनाने पर पुनर्विचार करने की बात कही थी। अब देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए तीर्थ पुरोहित फिर से लामबंद हो गए हैं। 

बोर्ड में आठ सदस्य
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं। पर्यटन मंत्री बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं। जबकि बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सदस्य सचिव, बदरीनाथ, गंगोत्री के विधायक, मुख्य सचिव, वित्त सचिव, पर्यटन सचिव सदस्य हैं।

देवस्थानम बोर्ड बनाने के पीछे यही मकसद था कि चारों धामों में अवस्थापना विकास हो और देश दुनिया से आने वाले तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले। केदारनाथ पुनर्निर्माण के साथ ही बदरीनाथ धाम को विकसित किया जा रहा है। देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के कारण तो बताए जाएं। कोर्ट की ओर से सरकार को बोर्ड बनाने के कोई निर्देश नहीं थे। सरकार की मंशा प्रदेश के तीर्थाटन को बढ़ावा देने की थी। जिसके लिए बोर्ड बनाने का फैसला लिया गया था।
-सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री
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