मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 127 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र को भेजी जा चुकी हैं और हफ्ते भर में 52 डीपीआर और केंद्र को भेज दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों को जवाब मिल जाएगा जो यह साबित करने की कोशिश करते रहते हैं कि राज्य सरकार केंद्र को कोई प्रस्ताव नहीं भेज रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़कों के मद में केंद्र सरकार से 1074 करोड़ रुपये मांगे गए हैं।
निर्माण गति तेज करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले एक किमी प्रतिदिन के लिहाज से सड़क निर्माण हो रहा था। वर्ष 2014-15 में दो किमी प्रति दिन के लिहाज से सड़क निर्माण गति बढ़ाई गई। अगले साल इसे और सुधारा जाएगा। कोशिश है कि तीन किमी सड़क निर्माण की प्रतिदिन गति हो।
उन्होंने बताया कि सड़कों की 127 डीपीआर के लिए 760 करोड़ रुपये और 52 डीपीआर के लिए 314 करोड़ रुपये केंद्र से मांगे गए हैं। वर्ष 2014-15 का 142 करोड़ रुपये केंद्र पर बकाया है। इस संबंध में कई बार केंद्र को अनुरोध पत्र भेजे जा चुके हैं।
पहले भी केंद्र ने दिए कम रुपये
वर्ष 2014-15 में राज्य ने 455 करोड़ 85 लाख रुपये व्यय किए हैं, लेकिन केंद्र ने 313 करोड़, 13 लाख रुपये ही अवमुक्त किए। वर्ष 2013 की आपदा के समय केंद्र सरकार ने पीएमजीएसवाई सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए 61 करोड़ 61 लाख रुपये स्वीकृत किए थे परंतु अभी तक अवमुक्त नहीं किए।
प्रदेश में 1121 बस्तियां ऐसी हैं जो सड़क विहीन हैं। नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम के तहत वर्ष 2015-16 में 48 करोड़ 95 लाख रुपये ही अवमुक्त किए गए जबकि राज्य को 1 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है।