चंपावत के ‘दशरथ मांझी’ के नाम से विख्यात पूर्व फौजी बृजेश चंद्र बिष्ट (38) की जहर खाने से मौत हो गई है।
जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बृहस्पतिवार को उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय उनकी रास्ते में ही मौत हो गई। शुक्रवार को देर शाम खेतगाड़ी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। गमगीन माहौल में उनके दोनों बेटों ने चिता को मुखाग्नि दी।
मई 2017 में फौज की शानदार सेवा के बाद रिटायर हुए बृजेश चंद्र बिष्ट खेतीबाड़ी के अलावा टैक्सी भी चलाते थें। बताया गया कि पिछले कुछ समय से तनाव के कारण वे नशे की गिरफ्त में आ गए थे। परिजन उनकी इस आदत में सुधार के लिए नशा मुक्ति केंद्र भी ले जाना चाहते थे, मगर इससे पहले ही उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पिता के अलावा वे अपने पीछे पत्नी के अलावा तीन बच्चों को छोड़ गए। अंतिम संस्कार के दौरान विधायक पूरन सिंह फर्त्याल सहित क्षेत्र के लोगों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
हर पल साथ रहते थे बृजेश
चंपावत जिले के ‘दशरथ मांझी’ कहे जाने वाले बृजेश बिष्ट ने अपने दम पर सड़क बनाकर जहां उन्होंने गांव तक लोगों की राह सुगम की वहीं के बारे में गांववालों का खूब सहयोग भी करते थे। इलाके के क्षेत्र पंचायत सदस्य व भाजपा जिला महामंत्री नवीन बोहरा कहते हैं कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि जोश व जुनून से भरपूर बृजेश अब हमारे बीच नहीं है। वे हमेशा गांव के हर रचनात्मक कार्य में बढ़-चढ़ कर आगे रहते थे।चंद्रशेखर बिष्ट ने बताया कि लोगों को आगे बढ़ने वाला व्यक्ति अपने जीवन से कैसे हार गया, यह समझ में नहीं आया। महेश बोहरा, जीवन, साकेत पुनेठा, राकेश बोहरा आदि भी उनकी सहयोगी प्रवृत्ति के कायल हैं।