उत्तराखंड क्रिकेट की सीनियर टीम के कोच पद से इस्तीफा देने से चर्चा में आए वसीम जाफर सांप्रदायिक होने के आरोपों से आहत हैं। उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के सचिव महीम वर्मा के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन पर अपने पद की जिम्मेदारी के अनुरूप और टीम हित में काम न करने का भी आरोप लगाया। महीम वर्मा और रिजवान ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि जाफर ने अपरिपक्वता दिखाई है।
इस बारे में सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन रिजवान शमशाद ने वसीम के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जब चयन समिति के सदस्य मैच देखने गए थे तो कोच ने कभी उनसे बात नहीं की। जब उनसे वो बात नहीं कर रहा है तो मेरे से कैसे बात करता। वसीम को अगर कोई दिक्कत थी तो बात की जा सकती थी। इस तरह की बात सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थी। चयन समिति सदस्य अजय तिवारी ने भी कहा कि वसीम से फोन न पर जब उन्होंने मैच के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वह उनसे बात नहीं कर सकता।
उन्होंने वसीम पर आरोप लगाया कि 18 जनवरी को उत्तराखंड की टीम ने आखिरी मैच खेला पर अभी तक उन्होंने अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई की नियमावली के तहत नहीं सौंपी है। सचिव महीम वर्मा का कहना है कि वसीम बड़े खिलाड़ी हैं, इसमें कोई शक नहीं पर सचिव को इग्नोर करना और बात करने का गलत लहजा उन्हें पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट का कोई मजहब नहीं होता तो मैदान में धार्मिक गुरू का आना समझ से परे है।
....तो दिक्षांशु को वसीम बनाना चाहते थे कप्तान
वसीम जाफर ने कहा कि विजय हजारे के लिए वह दिक्षांशु को कप्तान बनाना चाहते थे पर उन्हें मना कर दिया गया। विजय हजारे के लिए उन्होंने 22 खिलाड़ियों की लिस्ट मेल की पर महीम और चयन समिति ने उस लिस्ट को तवज्जो नहीं दी। इस बारे में चयन समिति के सदस्य अजय तिवारी ने कहा कि पहली बात कोच टीम नहीं चुनता, यह काम चयनकर्ताओं का होता है। कोच सिर्फ अपनी राय देता है, लेकिन वसीम अपनी मनमर्जी चलाना चाहते थे।