छह लाख की मशीन पर 18 लाख की देनदारी
केंद्र के लिए 1990 में चारा उगाने वाली फामेटा मशीन खरीदी गई थी। जर्मनी से 6 लाख रुपये में खरीदी गई इस मशीन से कुछ समय तक तो लाभ मिला, लेकिन कस्टम ड्यूटी का भुगतान न होने से मशीन को वर्ष 1994 में सीज कर दिया गया था। कस्टम ड्यूटी और जुर्माना मिलाकर कुल 18 लाख की देनदारी बनी थी। अब यह मशीन दिवालीखाल-भराड़ीसैंण मोटर मार्ग किनारे पड़ी हुई है।
हेमवती नंदन बहुगुणा की पहल पर खुला था केंद्र
वर्ष 1975 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा भराड़ीसैंण पहुंचे थे। उन्होंने यहां पशुपालन का बड़ा संस्थान खोलने की बात कही थी। उनके सपने को वर्ष 1979 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. शिवानंद नौटियाल ने भराड़ीसैंण में विदेशी पशु प्रजनन केंद्र स्थापित कर साकार किया था।
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भराड़ीसैंण के विदेशी पशु प्रजनन केंद्र में अब एक भी पशु नहीं है। डेयरी को ऋषिकेश शिफ्ट कर दिया गया है। भविष्य में वहां चारा ट्रेनिंग सेंटर बनाने की योजना है। इस सेंटर से क्षेत्र के लोगों को चारा उगाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। - डॉ. राजेंद्र सिंह मठपाल, इंचार्ज विदेश पशु प्रजनन केंद्र भराड़ीसैंण।