दून मेडिकल अस्पताल की मनोवैज्ञानिक निधि काला ने बताया कि शेल्टर होम में ठहराए गए ज्यादातर लोग जिनमें मजदूर वर्ग ज्यादा है वह अपने घर जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह वक्त फसल काटने आदि का है।
किसी के घर में शादी है। वे इस बात को लेकर चिंता में रह रहे हैं। वहीं, अस्पताल में भर्ती मरीज सवाल कर रहे हैं कि जब वह घर जाएंगे तो लोग पता नहीं उनके साथ कैसा व्यवहार रखेंगे। मिलने आएंगे भी या नहीं।
उन्हें समझाया जा रहा है कि इस वक्त सभी को अपने-अपने घरों में ही रहना है। यह वक्त इस बात को सोचने का नहीं, बल्कि खुद को मन और शरीर से स्वस्थ्य रखने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का है।