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मनोरम नहीं होगी मनोरमा की राह, क्रास वोटिंग का खतरा!

Sat, 08 Nov 2014 10:58 AM IST
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, देहरादून
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दून की पूर्व मेयर मनोरमा शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भले ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को मनोरम मात दी है, लेकिन मनोरमा को राज्यसभा तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
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सूत्र बताते हैं कि बहुगुणा खेमा इस समय रावत की इस चाल से बेहद खफा है। वह किसी भी हद तक जाकर रावत को सबक सिखाने के लिए तैयार है। इसके लिए रणनीति भी बन गई है। असंतुष्ट खेमे की रणनीति को भाजपा से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

विश्वस्त सूत्र का दावा है कि चुनाव के समय क्रास वोटिंग होनी तय है। कम से कम 14 विधायक मनोरमा के खिलाफ और भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने वाले हैं।
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शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जब अचानक राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए देहरादून की पूर्व मेयर मनोरमा डोबरियाल शर्मा का नाम घोषित किया तो प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। यही नहीं, राजनीति में जरा भी रुचि रखने वाले ने भी मनोरमा के नाम पर आश्चर्य व्यक्त किया। दूसरी ओर रावत खेमा इसे अपनी जीत के रूप में देख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक और कांग्रेस के कई नेता भी मानते हैं कि यह सब बहुगुणा को नीचा दिखाने के लिए किया गया है। कई कांग्रेसी तो यहां तक मानते हैं कि इसके बाद प्रदेश की राजीनीति में बहुगुणा का चलना कठिन हो जाएगा।
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बहुगुणा खेमा का अपमान

उधर, बहुगुणा खेमा इसे अपना अपमान बता रहा है। बहुगुणा खेमे के एक नेता का साफ कहना है कि प्रदेश के बाहर का प्रत्याशी उतार दिया जाता तो स्वीकार कर लिया जाता, लेकिन जिस तरह से बहुगुणा के मुकाबले एक लो प्रोफाइल व्यक्ति को उतार दिया गया है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बहुगुणा गुट का साफ कहना है कि हरीश रावत ने प्रदेश में कांग्रेस को टूट के कगार पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने पार्टी को अपनी जागीर बना ली है। पूर्व मुख्यमंत्री के खेमे का कहना है कि रावत ने अपने खेमे के आदमी को विधानसभा का अध्यक्ष बनवाया। उसके बाद खुद मुख्यमंत्री बन गए। फिर अपने ही आदमी को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया। यह खेमा सवाल करता है कि जब सबकुछ रावत खेमे को ही मिलेगा तो हम लोग कब तक बर्दाश्त करेंगे और क्यों?

बहुगुणा खेमे की रणनीति
बहुगुणा खेमा हरीश रावत को मात देने के लिए क्रास वोटिंग करने जा रहा है। उसका साफ मानना है कि इसके बाद अब भाजपा की तरफ से सतपाल महाराज मैदान में होंगे। ऐसे में वह बहुगुणा खेमा और सतपाल महाराज के समर्थक विधायक, जो कांग्रेस में हैं, उन्हें वोट दे देंगे। इस तरह महाराज की जीत हो जाएगी और रावत की प्रत्याशी मनोरमा की हार।

हालांकि इस तरह की किसी भी संभावना से रावत खेमा इनकार कर रहा है। लेकिन जिस तरह से रावत खेमे ने एक लो प्रोफाइल व्यक्ति को बहुगुणा के मुकाबले खड़ा किया है उससे यह खेमा बेहद आहत है और किसी भी हद तक जाकर बदला लेने को तैयार है।
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