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Uttarakhand: कांग्रेस ने अल्पसंख्यक पर फिर जताया भरोसा, जसविंदर सिंह को सौंपी गई महानगर की कमान

Thu, 13 Nov 2025 02:45 PM IST
रेनू सकलानी संजय चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

राज्य के सबसे बड़े शहर में कांग्रेस ने जसविंदर सिंह को फिर महानगर की कमान सौंपी है। जसविंदर सिंह ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और शहर की समस्याओं पर लगातार आवाज उठाने का काम किया।

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congress - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अध्यक्ष के रूप में जसविंदर सिंह गोगी को महानगर की दोबारा कमान सौंपने के पीछे संगठन की रणनीति गहरी है। गोगी को दोहराकर यह संकेत दिया गया कि पार्टी फिलहाल संगठन में स्थिरता और अनुभव पर भरोसा बनाए रखना चाहती है। साथ ही इस पुनर्नियुक्ति से पार्टी ने पहाड़-मैदान से बचने की कोशिश की है क्योंकि 2027 में भी चुनाव है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गुटबाजी पर नियंत्रण की एक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

पिछले कार्यकाल में जसविंदर सिंह ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और शहर की समस्याओं पर लगातार आवाज उठाने का काम किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्य की राजधानी होने और राज्य का सबसे बड़ा शहर होने के नाते देहरादून में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकता बेहद जरूरी है, क्योंकि यही क्षेत्र चुनावी दृष्टि से राज्य की राजनीति का केंद्र माना जाता है।

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पूरे जिले में यहां 10 विधानसभा सीटें हैं तो देहरादून शहर की राजनीति सीधे तौर पर छह सीटों को प्रभावित करती है। ऐसे में कांग्रेस का मानना है कि जसविंदर की पुनर्नियुक्ति का निर्णय पार्टी की आगामी रणनीति को स्थायित्व देने वाला कदम साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जसविंदर सिंह की टीम राजधानी में कांग्रेस के जनाधार को कितना सशक्त कर पाती है।

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गुटबाजी से किया किनारा

इसी साल नगर निगम चुनाव हुए थे। यहां पार्टी समर्थन से चुनाव लड़ने वालों की घोषणा गोगी द्वारा ही की गई थी। इस दौरान तमाम आरोप भी लगे थे। एक होटल की वीडियो भी वायरल हुई थी। इससे कुछ लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली थी। उसी समय इस विरोध को दबाने के लिए कड़े निर्णय लेकर कुछ लोगों को पार्टी से निष्कासित भी किया गया। चुनाव परिणाम 2018 के सापेक्ष अच्छे नहीं रहे थे। ऐसे में राजीनीतिक लोगों का मानना है कि महानगर अध्यक्ष पद पर दोबारा वही चेहरा लाने से पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ सकती है लेकिन कांग्रेस ने यह दोहराव कर गुटबाजी से किनारा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है।

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