प्रदेश की सियासत में जमीनी स्तर पर कांग्रेस का आधार कमजोर हो रहा है लेकिन पार्टी में दिग्गज नेताओं में फेस के लिए संग्राम चल रहा है। हर नेता की कोशिश है कि पार्टी का चेहरा बने। इसके लिए अपने क्षत्रपों से एक-दूसरे की घेराबंदी के लिए फिल्डिंग सजाने पर ज्यादा आमदा हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं रही है। यही वजह कि अनुशासनहीनता भी दिखाई देती है।
प्रदेश की राजनीति में 2017 और उसके बाद हुए विधानसभा व लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लगातार करारी हार का सामना करना पड़ा। 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी के दावे कर रही है लेकिन पार्टी में चुनाव वर्ष के शुरूआत में ही जिस तरह की गुटबाजी व नेताओं में बीच एक-दूसरे के प्रति तीखी बयानबाजी हो रही है। उससे सत्ता में वापस के दावे को हकीकत में बदलना आसान नहीं है। 2027 का चुनाव जिस चेहरे पर लड़ा जाएगा, यह तो हाईकमान तय करेगी लेकिन इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच फेस की लड़ाई दिखाई देने लगी है।