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प्रचार अभियान में पिछड़ने के संकट से जूझेगी कांग्रेस

Fri, 20 Jan 2017 12:14 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होने जा रही है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस अभी तक एक भी प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। राष्ट्रीय दलों में केवल भाजपा एकमात्र दल है जिसके 90 प्रतिशत प्रत्याशी तय हो चुके हैं। बसपा अभी तक 50 का टिकट पक्का कर पाई है।
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कांग्रेस में दावेदारों के बीच अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। सूची जारी करने में देरी से पार्टी प्रत्याशी बनने से पहले ही वे भाजपा और बसपा से पिछड़ गए हैं। उधर, समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव खेमे की ओर से जारी 26 प्रत्याशियों की सूची अब निरस्त हो चुकी है।

ऐसे में मतदान को शेष बचे 25 दिनों में प्रत्याशियों को भारी संघर्ष करना पड़ेगा। सर्वाधिक दिक्कत प्रदेश की 40 पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्र वाली विधानसभाओं में रहेगी, जहां प्रचार के लिए पैदल चलना ही एकमात्र विकल्प है। निर्वाचन आयोग के 4 जनवरी को मतदान प्रक्रिया की घोषित करने के 15 दिन गुजरने के बाद भी सियासी दल प्रत्याशियों पर पूरी स्थिति साफ नहीं कर पाए हैं। प्रत्याशियों की सूची जारी करने की शुरूआत बसपा ने की।
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बसपा ने 14 जनवरी को अपनी पहली सूची जारी कर 50 प्रत्याशी घोषित कर दिए। भाजपा ने लंबा माथापच्ची के बाद 16 जनवरी को 64 की पहली सूची जारी कर 6 विधानसभाओं पर नाम रोक लिए हैं। वहीं, प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया सबसे पहले शुरू करने वाली सत्ताधारी पार्टी में अभी तक टिकटों पर पेच फंसा है। कांग्रेस की बड़ी दिक्कत यह है कि उनके खेमे से लगातार मंत्री विधायक भाजपा में शामिल हो रहे हैं, जिससे आलाकमान के लिए मजबूत प्रत्याशी तलाशना चुनौती बना हुआ है।

कांग्रेस में सीएम चेहरे का टिकट तय नहीं
कांग्रेस के सीएम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट हो रहे हरीश रावत को कहां से उतारा जाना है, पार्टी यही तय नहीं कर पाई है। रावत चुनाव लड़ेंगे की नहीं यह भी स्थिति साफ नहीं हो रही। पार्टी का दूसरा बड़ा चेहरा प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को लेकर भी यही स्थिति है। दूसरी तरफ भाजपा अपने दिग्गजों पर स्थिति साफ कर चुकी है कि कोई पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव नहीं लड़ेगा। दिग्गजों में प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, हरक सिंह, सतपाल महाराज सहित अन्य बागियों को पसंदीदा सीट पर टिकट दिया जा चुका है।

कैसे हो पाएगा डैमेज कंट्रोल?
भाजपा सहित जिन दलों के अधिकांश प्रत्याशी घोषित हुए हैं उनको इसका दोहरा फायदा मिल रहा है। एक तो प्रत्याशियों को अपना प्रचार अभियान शुरू करने से बढ़त मिली है। दूसरा उनके टिकट पक्का होने से नाराज अन्य दावेदारों के डैमेज कंट्रोल के लिए भी पर्याप्त समय है। भाजपा तीन दिन से बागियों के संभावित भितरघात से निपटने के लिए डैमेज कंट्रोल तंत्र को सक्रिय कर चुकी है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टिकट घोषित करने के बाद जो दावेदार बगावत को आमादा होंगे उससे निपटने में दिक्कत आएगी।
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यह है टिकटों की स्थिति
- बसपा के 50 प्रत्याशी 14 जनवरी को घोषित
- भाजपा के 64 प्रत्याशी 16 जनवरी को घोषित
- सपा 15 जनवरी को 26 की जारी सूची कर चुकी है निरस्त
- कांग्रेस में अभी तक किसी भी सीट पर प्रत्याशी तय नहीं हुए
- क्षेत्रीय दल किस्तों में जारी कर रहे हैं टिकट

यह है चुनाव कार्यक्रम
20 से 30 जनवरी तक नामांकन
1 फरवरी नाम वापसी की अंतिम तिथि
15 फरवरी को मतदान
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