मानव वन्यजीव संघर्ष के ये कारण आए सामने
बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के पीछे गांवों से पलायन के कारण कम आबादी घनत्व, एलपीजी सिलेंडरों की त्वरित आपूर्ति सेवा का अभाव, सड़कों पर लगी लाइटों की खराब स्थिति, पालतू पशुओं की लंबी अवधि तक चरान, चुगान, गांवों की खाली एवं बंजर जमीनों पर लेंटाना, बिच्छू घास, काला घास, गाजर घास के उगने से जंगली जानवरों को छुपने की जगह मिलना जैसे कारण सामने आए।
यहां चल रहा पहले से प्रोजेक्ट
मानव-वन्य जीवन संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए एक प्रोजेक्ट पौड़ी गढ़वाल के कुछ क्षेत्रों चलाया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत सर्वाधिक मानव-वन्यजीव संघर्षो वाले गांवों जिनमें 17 से अधिक मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं हुई हैं, की पहचान की गई है।
60 से 80 प्रतिशत फसल नष्ट कर देते हैं वन्यजीव
भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि फसलों को नुकसान पहुंचाने के लिए जंगली सूअर और भालू सबसे अधिक उत्तरदायी हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित जिन गांवों में सर्वे किया गया वहां गेंहू का उत्पादन बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने मंडुआ, हल्दी और मिर्च का उत्पादन शुरू कर दिया। 50 प्रतिशत गांवों में सभी मौसमों में 60-80 प्रतिशत फसलें वन्यजीव नष्ट कर देते हैं। 100 प्रतिशत ग्रामीणों ने माना कि यदि वन्यजीवों की ओर से फसलें नष्ट नहीं की जाती तो कृषि कार्य उनके लिए लाभकारी होता। प्रभावित गांवों के कुल कृषि क्षेत्र का 50 प्रतिशत क्षेत्र खाली पड़ा है।