इसलिए हुआ नियमावली में संशोधन
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आरटीई की 2011 की नियमावली में फरवरी 2021 में संशोधन किया गया था। यदि यह संशोधन न किया जाता तो पुरानी नियमावली से प्राइवेट स्कूलों को हर महीने 4200 रुपये फीस देनी पड़ रही थी।
हर साल खर्च होंगे करीब डेढ़ अरब
प्राइवेट स्कूलों में आरटीई कोटे के बच्चों की फीस (प्रतिपूर्ति) पर वर्तमान में एक अरब 15 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अब हर साल लगभग डेढ़ अरब खर्च होंगे। इसमें 90 प्रतिशत भागीदारी केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य की होगी।
विद्या मंदिर रतूड़ा में सबसे कम फीस
प्रदेश में आरटीई कोटे के बच्चों की सबसे कम फीस सरस्वती विद्या मंदिर रतूड़ा रुद्रप्रयाग में 140 रुपये है। जबकि दिल्ली पब्लिक स्कूल हल्द्वानी की ओर से सबसे अधिक 2600 रुपये फीस की मांग की जा रही है। विभाग के सर्वे में यह बात सामने आई।
प्राइवेट स्कूल पिछले काफी समय से फीस बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए 1893 रुपये फीस तय की गई है।
- बंशीधर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक
हम बहुत कम फीस पर आरटीई कोटे के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब जो फीस तय हुई है इस पर अन्य स्कूलों से बात करने के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाएंगे।
- प्रेम कश्यम, अध्यक्ष प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन।