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उत्तराखंड के CM हरीश रावत कर रहे कक्षा आठ की पढ़ाई!

Fri, 02 Oct 2015 01:47 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों कक्षा आठ की पढ़ाई कर रहे हैं। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं इसके पीछे एक बेहद बड़ा कारण छुपा हुआ है।
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सीएम हरीश रावत ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी इच्छा है कि वह एक घंटा किसी स्कूल में आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा सकें। गुरुवार को नालापानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में पहुंचे सीएम ने यह इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम इतना बदल चुका है कि अब कुछ समझ में आ पाना मुश्किल सा लग रहा है, फिर भी लगा हूं मेहनत करने में।

राजकीय इंटर कॉलेज में महिला आयोग एवं शिक्षा विभाग की ओर से संयुक्त रूप से हिंसा को रोकने, लैंगिक असमानता दूर करने सहित आठ बिंदुओं पर शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।
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समारोह के मुख्य अतिथि सीएम हरीश रावत ने छात्रों को हिंसा रोकने, दहेज प्रथा के खिलाफ, भ्रूण हत्या रोके जाने सहित आठ बिंदुओं पर शपथ दिलवाई। इस मौके पर प्रदेश भर के स्कूलों में कुल चार लाख छात्रों ने एक साथ यह शपथ ली।
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'अपनी पत्नी के हाथ का बना हलवा खिलाऊंगा'

मुख्यमंत्री ने बच्चों के बीच जाकर उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि आजकल के अभिभावकों का ध्यान टीवी पर अधिक है और बच्चों को पढ़ाने में कम। उन्होंने महिला आयोग का भी इस नई सोच के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि अब से प्रतिदिन छात्रों को यह शपथ रोज सुबह दिलवाई जाए।

महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजिनी कैंतुरा ने कहा कि पहली बार राज्य में ऐसा किया गया है कि छात्रों को इस तरह की शपथ दिलाई गई हैं। इस मौके पर प्रमुख सचिव महिला सशक्तिकरण राधा रतूड़ी, विधायक उमेश शर्मा, ब्लाक प्रमुख बीना बहुगुणा, प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार रतूड़ी आदि उपस्थित थे।

मैं कौन हूं?
मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि मैं कौन हूं, क्या आप मुझे जानते हैं, जानते हैं तो कैसे जानते हैं? उन्होंने शिक्षा मंत्री के बारे में पूछा कि क्या इन दाढ़ी वालों को जानते हो। राधा-रतूड़ी का परिचय कराते हुए कहा लगती है ना आपकी चाची-ताई जैसी।
इसी तरह से मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी का इंट्रोडक्शन छात्रों से कराया। उन्होंने कहा कि यदि आप फर्स्ट आएंगें तो मैं अपनी पत्नी के हाथ का बना हलवा खिलाऊंगा। वो हलवा बहुत अच्छा बनाती है। अच्छे नंबर लेकर आप मुझसे मिलने जरूर आएं।

धूप में तपते रहे छात्र-शिक्षक
आयोजकों ने एक ओर मंच के साथ टैंट लगाया हुआ था तो वहीं छात्र-छात्राओं के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसे सभी बच्चे, शिक्षक और प्रधानाचार्य भी धूप में ही बैठे थे।

जब मुख्यमंत्री को प्रधानाचार्य मंच पर नहीं दिखे तो उन्हें बुलाया और आयोजकों से नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा नहीं करना चाहिए, सबसे पहले प्रधानाचार्य को सम्मान देना चाहिए।
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