उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत कांग्रेस का गढ़ बचाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार और भाजपा सीबीआई और ईडी का दबाव बनाकर कांग्रेस को कमजोर करना चाहती है। रावत मानते हैं कि दबाव है लेकिन भरोसा है कि राज्य की जनता काम के आधार पर स्पष्ट बहुमत देगी। रावत ने साफ कर दिया है कि उनके बेटे और बेटी चुनाव नहीं लड़ेंगे। विशेष संवाददाता अनूप वाजपेयी ने मुख्यमंत्री से बदले राजनीतिक हालात पर बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश।
प्र. भाजपा ने उत्तराखंड में कांग्रेस को राजनीतिक जाल में फंसा दिया है।
उ. भाजपा अपने जाल में फंस गई है। केंद्र सरकार हरीश मुक्त उत्तराखंड चाहती है। आखिर क्या है छोटे से राज्य में। दिल्ली गामा पहलवान के समान है जब चाहें फूंककर उड़ा दें। तूफान खड़ा कर दिया है छोटे से राज्य में। राष्ट्रपति शासन लगाया, सीएम पर सीबीआई का शिकंजा कसा, राज्य का बजट हाईजैक कर लिया। पीएम रैली से लौटकर गए तो एपीएल का गेहूं और मिट्टी के तेल का कोटा बंद कर दिया। ईको सेंसेटिव जोन के नाम पर विकास रुक गया है।
प्र. कांग्रेस के बड़े नेता नाराज होकर बीच चुनाव छोड़कर जा रहे हैं।
उ. कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता। भाजपा ने अपने ही प्रधानमंत्री को झुठला दिया है। वे कहते हैं बेटे परिवार को टिकट नहीं देंगे। जबकि परिवारवाद का विरोध करने वालों ने हमारे यहां से गए पिता-पुत्र को टिकट दे दिया। अटल जी दलबदल को कलंक कहते थे लेकिन भाजपा उत्तराखंड में कांग्रेस की बी टीम की तरह दिख रही है। भाजपा ने अपनी विचारधारा, नीति से समझौता कर अपने नेताओं को अपमानित किया है।
प्र. आपके बेटे और बेटी भी तो टिकट मांग रहे हैं।
पार्टी ने मुझे स्पष्ट कर दिया कि एक परिवार से एक ही टिकट मिलेगा। मेरे बच्चों ने तो उन सीटों पर तैयारी की थी जहां कांग्रेस कभी नहीं रही। मेरे लिए पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।
प्र. मंत्री यशपाल आर्य और दिग्गज एनडी तिवारी क्यों चले गए।
उ. यशपाल जी बेटे के लिए नैनीताल से टिकट मांग रहे थे वहां कांग्रेस की अपनी विधायक है। पार्टी ने तय कर लिया कि एक परिवार एक टिकट। यशपाल जी को पार्टी ने कम नहीं दिया संगठन और सरकार में प्रमुख पदों पर रहे। आखिर कौन सा दबाव था। मेरे तो अच्छे संबंध है लेकिन ऊधमसिंह नगर में चर्चा कुछ और है। मैं नहीं कहना चाहता। तिवारी जी जीवन के अंतिम प्रहर में हैं। मैं आदर करता हूं। हालांकि मुझसे राजनीतिक प्रेम नहीं रहा। पार्टी ने उन्हें क्या नहीं दिया। कई बार सीएम, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री बनने के कितने मौके दिए। मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा लेकिन पुत्र मोह में ऐसा फैसला लिया।
प्र. लेकिन इन नेताओं ने पार्टी को कई-कई साल दिए हैं।
उ. जितने नेता छोड़कर गए हैं, कांग्रेस के मुसीबत भरे दिनों में कोई नहीं था। 1992 में कांग्रेस विरोधी वातावरण था। 2002 में इनमें से कोई चेहरा नहीं था। जब सुनहरे दिन आए तो ये अवतरित हुए। पार्टी पर थोपे गए और फायदा उठाने वाले गए हैं। 1977 की चुनौतियों में भी ये सब नहीं थे।
प्र. भाजपा आपके खिलाफ भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ने जा रही है।
उ. भाजपा में जो गए हैं वे पार्टी का बोझ रहे हैं। कार्यकर्ता अतिरिक्त बैगेज ढो रहे थे। ये वही लोग हैं जिनके खिलाफ भाजपा ने कभी विधानसभा नहीं चलने दी तो कभी प्रदर्शन किया। नारे लगाते थे भ्रष्टाचार सौ गुणा। पॉली हाउस को लेकर जिन्हें घेरा उनके पति मैदान में है। दाबका और कोसी में खनन कराने वाले, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले सब चले गए हैं। मेरे पास पैतृक जमीन के अलावा राज्य में एक इंच जमीन नहीं है। शराब का सिंडिकेट प्राइवेट व्यापारी से लेकर पब्लिक सेक्टर की मंडी को दिया और मैं ही शराब माफिया हूं। मैंने अपने ढाई साल के कार्यकाल में खनन और क्रशर के एक भी पट्टे नहीं दिए लेकिन तोहमत मेरे ऊपर। भाजपा कीचड़ उछालने और बार-बार झूठ बोलने का काम करती है।