व्यापम और ललित गेट सरीखे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस के अभियान को उत्तराखंड के सीएम के पीएस के स्टिंग खुलासे से तगड़ा झटका लगा है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव मोहम्मद शाहिद पर रिश्वत लेकर शराब के लाइसेंस आवंटित करने का आरोप लगा है। भाजपा से एक केंद्रीय मंत्री और दो मुख्यमंत्रियों का इस्तीफा मांग रही कांग्रेस को अब मुख्यमंत्री हरीश रावत से इस्तीफा लेने की नई मांग का सामना करना पड़ा है।
भाजपा ने बाकायदा स्टिंग पेश करके मुख्यमंत्री हरीश रावत का इस्तीफा मांगा है और वह बुधवार को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलने के लिए तैयार हो गई है। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के सवाल पर कांग्रेस सीधा जवाब देने से बच रही है।
पार्टी ने सफाई दी है कि इस मुद्दे पर उत्तराखंड सरकार ने संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं और 60 दिन के अंदर रिपोर्ट आ जाएगी। स्टिंग ऑपरेशन में आवाज के नमूने की जांच करवाई जा रही है।
कांग्रेस फिलहाल तो रावत के बचाव में बोल रही है। मगर यह मामला तूल पकड़ने पर पार्टी के लिए उनका बचाव करना मुश्किल पड़ सकता है। दरअसल, पार्टी नैतिकता के आधार पर ललित मोदी विवाद को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तो व्यापमं घोटाले पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इस्तीफा मांग रही है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सचिव का सीधा नाम आने के बाद अब मोदी सरकार के खिलाफ पार्टी की रणनीति पटरी से उतर सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत इस मामले को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने मामले की जांच के तुरंत आदेश दिए हैं।
गोगोई ने कहा कि उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने आबकारी नीति को बदला है। पहले निजी कंपनियों को ठेका दिया जाता था, जिससे प्रदेश में शराब माफिया पैदा हो गए थे। कांग्रेस सरकार ने लॉटरी प्रणाली के जरिए आबकारी नीति को बदला और एक पारदर्शी प्रक्रिया को स्थापित किया।