आधुनिक तकनीक से अवैध निर्माण को चिह्नित करें
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण चिह्नित करें। इसके लिए जीआईएस, सैटेलाइट चित्र और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। यदि किसी अवैध निर्माण के मामले में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। प्रत्येक विकास प्राधिकरण में अवैध निर्माण निगरानी डैशबोर्ड बना कर संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण की तारीख, जारी किए गए नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक प्रत्येक चरण की रियल टाइम स्थिति उपलब्ध होनी चाहिए।
सिटीजन फ्रेंडली हो प्राधिकरण की वेबसाइट
मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की वेबसाइट सिटीजन फ्रेंडली होनी चाहिए, जिससे आम नागरिकों को योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
लैंड पूलिंग योजना तैयार करें
मुख्यमंत्री ने लैंड पूलिंग योजना के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो या तीन विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजना लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इस योजना के अंतर्गत किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाए और उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन ग्रामीण व अर्द्धशहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों का क्षेत्र आता है, वहां भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।