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उत्तराखंड शासन ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, लेकिन CM ने बताया गलत

Mon, 14 Sep 2015 01:15 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड शासन की ओर से मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत में पकड़े गए लाखों रुपए के फर्जीवाड़े को मुख्यमंत्री ने गलत ठहराते हुए इसे उत्पीड़न बताया है।
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सहसपुर ब्लॉक के गल्जवाड़ी में चार योजनाओं में फर्जी बिलों से भुगतान और तार जाल लगाए बगैर भुगतान का मामला सामने आया था। शासन की जांच में मामला पकड़ में आने के बाद मुख्यमंत्री ने इस मामले में फिर से जिलाधिकारी को सीडीओ से जांच कराने के आदेश दिए हैं। मामले में मुख्यमंत्री द्वारा पुन: जांच कराने के आदेश के बाद सरकार की मंशा पर ही सवाल उठने लगे हैं।

इंदिरा नगर देहरादून निवासी गौतम प्रसाद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में फर्जीवाडे की शिकायत की थी। उनकी शिकायत पर शासन ने ग्राम पंचायत गल्जवाड़ी में पिछले पांच साल में विकास कार्यों की जांच के आदेश दिए।
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शासन के आदेश पर हुई जांच में ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत चार योजनाओं में दस लाख से अधिक की गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि गांव में बरानी नदी में 72 तार जाल लगाए जाने दिखाए गए हैं, लेकिन मौके पर केवल 60 तारजाल लगे थे।

इंद्रानगर में बरानी नदी के किनारे 74 तार जालों में से 60 तार जाल ही सही स्थिति में मिले। इसमें 10 तार जाल क्षतिग्रस्त थे, जबकि चार तार जाल लगाए बगैर ही माप पुस्तिका में अंकित किए गए। इसके अलावा दो अन्य योजनाओं में भी गड़बड़ी सामने आई।

लाखों रुपए की गड़बड़ी सामने आने पर अपर सचिव ज्योति निरज खैरवाल ने 13 मई, 2015 को जिलाधिकारी देहरादून रविनाथ रमन को यह निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान और मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता से 10 लाख 47 हजार 979 रुपए की वसूली की जाए।

अपर सचिव ने डीएम को दिए निर्देश में कहा कि खंड विकास अधिकारी एवं उप कार्यक्रम अधिकारी ने क्षेत्र भ्रमण किए बगैर फर्जी बिलों से भुगतान किया है। उनकी सीआर में प्रतिकूल प्रविष्ट के साथ ही उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। वहीं ग्राम पंचायत के पूरे पांच साल के कार्यों का स्पेशल ऑडिट कराया जाए।
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लेकिन इससे पहले की लाखों रुपए की गड़बड़ी के मामले में कार्रवाई होती, मुख्यमंत्री ने अपर सचिव के आदेश को गलत बता दिया। मुख्यमंत्री ने अपर सचिव के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि अपर सचिव स्थलीय निरीक्षण नहीं किया। सीडीओ देहरादून से मामले की जांच कराई जाए।
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