उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्ची की मौत के मामले में सीएचसी रायपुर और दून महिला अस्पताल के तीन डाक्टरों को तलब किया है। आरोप है कि इलाज में लापरवाही से बच्ची की मौत हो गई। आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि तीनों डाक्टर 25 जुलाई को आयोग में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें।
बंजारावाला निवासी अनिल नौटियाल के मुताबिक 14 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायपुर में उनकी बेटी पैदा हुई। आरोप है कि उसके पैदा होने के कुछ देर बाद उसकी सांसे तेज चलने लगी। इसकी जानकारी अस्पताल के डाक्टरों को दिए जाने के बावजूद डाक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं उनकी ओर से फोन पर उनके साथ अभद्रता की गई। बेटी को बाद में दून मेडिकल कालेज रेफर किया गया। मेडिकल कालेज में डाक्टर ने बताया कि अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं है।
बच्ची को महंत इंदिरेश अस्पताल रेफर किया जाए। आरोप है कि बगैर बाल रोग विशेषज्ञ के देखे बच्ची को रेफर किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता गुंजन भट्ट ने कहा कि दून मेडिकल कालेज से बच्ची को रेफर करने के दौरान एंबुलेंस में ऑक्सीजन का पाईप फटा था। बच्ची को किसी तरह एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई। सामाजिक कार्यकर्ता गुंजन भट्ट ने कहा कि प्रकरण से उत्तराखंड बाल अधिकार आयोग को अवगत कराया गया। जिस पर आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी की ओर से सीएचसी रायपुर के डॉक्टर डॉ. आरपी एस राणा, इसी अस्पताल के डा.बीएस पाण्डेय एवं दून महिला अस्पताल के डॉ. अविनल कालरा को 25 जुलाई को आयोग में तलब किया गया है।