मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की एक घोषणा 21 दिन बाद भी विधानसभा से सचिवालय नहीं पहुंची है। उन्होंने विस में बजट सत्र के दौरान सदन में ऐलान किया था कि प्रदेश सरकार पांच करोड़ रुपये तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को आवंटित करेगी।
उनकी इस घोषणा को हाथों हाथ लिया गया। खुद सत्तारूढ़ दल भाजपा ने इस घोषणा का राजनीतिक श्रेय लेना आरंभ कर दिया है। मगर ताज्जुब की बात है कि शासन स्तर पर सीएम की इस घोषणा को लेकर एक पत्ता तक नहीं खड़का है। शासन के अफसर घोषणा से तो वाकिफ हैं, मगर यह किस स्तर पर है, इससे बेखबर हैं।
घोषणा सिस्टम के भीतर न जाने कहां भटक गई है। एक कन्फ्यूजन इस बात को लेकर भी है कि सदन के भीतर सीएम की यह घोषणा है या आश्वासन। जानकारों का कहना है कि सदन में कही बात यदि आश्वासन है तो इस पर अमल होने में अभी और विलंब होगा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी विधानसभा की समितियों का गठन होना हैं और इसमें आश्वासन समिति भी शामिल है। सूत्रों की मानें तो विस में की गई घोषणा मुख्यमंत्री के घोषणा प्रकोष्ठ तक नहीं पहुंची है। जबकि मुख्यमंत्री सदन के बाहर भी इसे दोहरा चुके हैं।
सदन में जब कोई विषय उठता है तो संबंधित विभाग के अधिकारी उसको नोट करते हैं। इसके बाद वह अपने प्रशासकीय अधिकारी को अवगत कराते हैं। प्रशासकीय अधिकारी उस पर आगे की कार्रवाई करते हैं। चाहे वह मुख्यमंत्री की घोषणा हो या आश्वासन।
- जगदीश चंद्र, सचिव, विधानसभा
मुख्यमंत्री या माननीय मंत्री सदन में जब कोई बात कहते हैं, तो वह आश्वासन समिति को जाता है। यह आश्वासन विधायी विभाग के माध्यम से शासन को प्राप्त होगा और इस पर आगे की कार्रवाई आरंभ की जाएगी ।
- अमित सिंह नेगी, सचिव, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर और बाहर पांच करोड़ रुपये तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को देने की घोषणा की है। यह आश्वासन नहीं बल्कि घोषणा है और इस पर शीघ्र से शीघ्र अमल होगा।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता
अकेले लोनिवि में 11 हजार से ज्यादा ठेकेदार
अकेले लोक निर्माण में ही 11 हजार से अधिक ठेकेदार हैं। विभाग में डी श्रेणी के 8100 ठेकेदार पंजीकृत हैं, जबकि एक श्रेणी के 1400 ठेकेदार हैं। बी श्रेणी के 700 और सी श्रेणी के 1000 ठेकेदार पंजीकृत हैं।