फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड : चारधाम देवस्थानम प्रबंधन एक्ट निरस्त, मंदिर कमेटी ही करेगी बदरी-केदार में व्यवस्थाओं का संचालन

Mon, 28 Feb 2022 04:54 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में 27 नवंबर 2019 को कैबिनेट ने उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक को मंजूरी दी थी।
विज्ञापन
kedarnath dham - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश में चारधाम के तीर्थ पुरोहितों के विरोध के बाद सरकार ने शीतकालीन सत्र में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक पारित कर इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। विधेयक पर राजभवन की मुहर लगने के साथ ही चारधाम देवस्थान प्रबंधन एक्ट निरस्त हो गया है। सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

विज्ञापन


प्रदेश में चारधाम में पूर्व की व्यवस्था लागू होगी। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर कमेटी ही केदारनाथ, बदरीनाथ में व्यवस्था का संचालन करेगी। भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में 27 नवंबर 2019 को कैबिनेट ने उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक को मंजूरी दी थी। नौ दिसंबर 2019 को यह विधेयक विधान सभा से पारित कराया गया। राजभवन से मंजूरी के बाद यह कानून बन गया था।

व्यवस्था से चारधाम के पंडा पुरोहितों में थी भारी नाराजगी
सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। 25 फरवरी 2020 को इसकी अधिसूचना जारी कर बोर्ड का गठन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री को इसका अध्यक्ष और धर्मस्व व संस्कृति मंत्री को उपाध्यक्ष बनाया गया।
विज्ञापन

तत्कालीन गढ़वाल मंडल आयुक्त रविनाथ रमन को बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद सौंपा गया था, लेकिन सरकार की इस व्यवस्था से चारधाम के पंडा पुरोहितों में भारी नाराजगी थी। उनका कहना था कि उनके हकहकूकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

दशकों से चली आ रही पंरपरा के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। सरकार एक्ट बनाकर मंदिर के वित्तीय और नीतिगत फैसलों पर नियंत्रण करना चाहती है। चारधाम के पंडा पुरोहितों के विरोध को देखते हुए धामी सरकार ने एक्ट को निरस्त किए जाने का निर्णय लिया और शीतकालीन सत्र में देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक प्रस्तुत कर इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। जिसे राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अब बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में पूर्व व्यवस्था बहाल हो गई है। 
 

Trending Videos
विज्ञापन

राजभवन ने उत्तराखंड किरायेदारी विधेयक पर लगाई मुहर 

सरकार ने पिछले वर्ष केंद्र सरकार की ओर से जारी किरायेदारी अधिनियम के मॉडल प्रारूप को प्रदेश में लागू करने के लिए इससे संबंधित विधेयक पारित करते हुए इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। जिस पर राजभवन ने मुहर लगा दी। विधेयक के अधिनियम बनने से मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हित सुरक्षित होंगे। इससे राज्य में किरायेदारी आवास बाजार पनपने से आवास की कमी भी दूर होगी।
 
प्रदेश में किरायेदारी विधेयक को मंजूरी के बाद यह अधिनियम बन गया है। जिसमें मकान मालिक और किरायेदारों के हितों की सुरक्षा के लिए नियम तय किए गए हैं। इसके लिए राज्य में किराया प्राधिकरण अस्तित्व में आएगा। यदि मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई विवाद है तो इसका निपटारा प्राधिकरण में हो सकेगा।  

ऐसे खत्म होंगे झगड़े
मकान मालिक व किरायेदार के बीच लिखित रूप से अनुबंध होगा और सहमति से ही किराया तय किया जाएगा। अधिनियम के हिसाब से मकान की पुताई से लेकर बिजली की वायरिंग, स्विच बोर्ड, पानी का नल ठीक करने आदि के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे मकान मालिक व किरायेदार के बीच किसी तरह का विवाद नहीं  रहेगा। इस कानून के लागू होने के बाद मकान मालिक अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। किराये से संबंधित विवाद व शिकायतों को किराया प्राधिकरण में निपटाया जाएगा।

आवासीय व व्यावसायिक दोनों भवन शामिल
उत्तराखंड किरायेदारी अधिनियम  2021 में न केवल आवासीय भवन बल्कि व्यावसायिक भवन भी शामिल होंगे। इससे किराया बाजार को बढ़ावा मिलेगा। जो जितना अधिक किराया लेगा, उसी हिसाब से सुविधाएं भी देगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें