परियोजना के तहत करीब 645 किमी सड़क पर कार्य चल रहे हैं। यहां आठ हजार करोड़ के 34 कार्य चल रहे हैं। इस भाग पर पहाड़ काटने का कार्य तकरीबन पूरा है। अधिकांश हिस्से में सड़क अपने अंतिम रूप में हैं। अलग-अलग स्थानों पर कुछ भाग बचा है, जहां चौड़ीकरण व भूस्खलन क्षेत्रों के ट्रीटमेंट के कार्य चल रहे हैं। लोनिवि का दावा है कि परियोजना के इन कार्यों पर कोर्ट का फैसला लागू नहीं होगा।
पर्यावरण बनाम सुरक्षा का सवाल
चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े सरोकारों के बीच फंसी है। पर्यावरणविदों का कहना है कि हर सूरत में सड़क की चौड़ाई कम होनी चाहिए। लेकिन सीमांत राज्य होने के कारण राज्य सरकार की चिंता सुरक्षा को लेकर है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वयं यह चिंता जाहिर कर चुके हैं।
उनका कहना है कि सामरिक महत्व की दृष्टि से सड़क की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर से अधिक होनी चाहिए। वह परियोजना के पुराने स्वरूप की वकालत कर रहे हैं और यह उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्र सरकार एक बार फिर इस मामले में नई पहल करेगी। लेकिन पर्यावरण से जुड़े लोगों की राय मुख्यमंत्री से जुदा है।
समाजसेवी व पर्यावरणविद सुरेश भाई कहते हैं, ऑलवेदर रोड के नाम पर पहाड़ में जिस लापरवाही से कटान हुआ है, उससे पर्यावरण को बहुत क्षति पहुंची है। अदालत का शुक्रिया कि उसने सड़क की चौड़ाई को सीमित किया। जहां तक सड़क बन चुकी है, हम उसकी बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन जहां सड़क नहीं बनी है, वहां अदालत के फैसले को कड़ाई से लागू करते हुए 5.50 मीटर तक ही चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाए। इससे पर्यावरण को कम क्षति पहुंचेगी।
चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना को लेकर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है। साढ़े पांच मीटर पर मेटलिंग होगी। हमें अवगत कराया गया है कि कोर्ट का आदेश जहां कार्य आरंभ हो गया है, उस पर लागू नहीं होगा।
- आरके सुधांशु, सचिव, लोनिवि