नीती घाटी में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। यहां शीतकाल में छह माह तक बर्फबारी और बारिश रहती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिकांश गांव बर्फ के आगोश में रहते हैं। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी ग्रामीणों की दिनचर्या गांवों में ही व्यतीत होती है। ग्रामीण कड़ाके की ठंड से बचने के लिए ग्रीष्मकाल में ही जंगलों से सूखी लकड़ी और खाद्यान्न सामग्री इकट्ठा कर लेते हैं।
दोपहर बाद घाटी में चक्रवात और बर्फीली हवाएं चलती हैं। घाटी के ऊंचाई वाले गांव नीती, मलारी, बांपा, फरकिया, महरगांव, द्रोणागिरी, कागा, गरपक गांव के ग्रामीण शीतकाल में छह माह तक जिले के निचले क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि जेलम, तमक, फाक्ती, लाता, सुरांईथोटा, सुकी, भलगांव, लौंग, पेंग, तोलमा गांव के ग्रामीण शीतकाल में भी अपने गांवों में रहते हैं।
ग्रामीणों का सेना के साथ है बेहतर समन्वय
चीन सीमा क्षेत्र होने के कारण नीती घाटी के ग्रामीणों का सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ बेहतर समन्वय रहता है। किसी भी आपदा में सैन्य बलग्रामीणों की हरसंभव मदद के लिए आगे रहता है। ग्रामीण भी सेना को हर तरह की मदद के लिए तैयार रहते हैं।