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Uttarakhand News : उत्तर भारत में तबाही का सबब बन सकते हैं हिमालयी ग्लेशियर

Mon, 08 Feb 2021 01:05 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तराखंड के ग्लेशियरों से गंगा, यमुना जैसी कई बड़ी नदियां निकलती हैं। इनसे पूरे उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की प्यास बुझती है। लेकिन ये ग्लेशियर पर्यावरणीय लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि उत्तराखंड की नदियों पर बड़े बांध बनाना काफी खतरनाक है।

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Uttarakhand Glacier Burst: इस बार कुदरत ने किया कुछ रहम, 2013 की आपदा में एकदम उलट थे हालात


उत्तराखंड में कुदरती आपदाओं की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। 2013 में अतिवृष्टि से चोराबरी ग्लेशियर में बनी झील के टूटने से केदारनाथ की आपदा आई थी। हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में बाढ़ आ गई थी। एक बार फिर ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने की घटना ने आगाह किया है कि हिमालयी ग्लेशियर और बांध पूरे उत्तर भारत में बड़ी तबाही का सबब बन सकते हैं। 
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वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में उत्तरकाशी स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, डोकरियानी, बंदरपूंछ ग्लेशियर के अलावा चमोली जिले में द्रोणगिरी, हिपरावमक,  बद्रीनाथ, सतोपंथ और भागीरथी ग्लेशियर स्थित है।

इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ धाम के पीछे स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर, खतलिंग, व केदार ग्लेशियर अति संवेदनशील हैं। जहां तक कुमायूं क्षेत्र में कुछ प्रमुख ग्लेशियरों का सवाल है तो पिथौरागढ़ में मिलम ग्लेशियर, काली, नरमिक,  हीरामणी, सोना, पिनौरा, रालम, पोंटिंग व मेओला जैसे ग्लेशियर प्रमुख हैं। वहीं बागेश्वर क्षेत्र में सुंदरढुंगा, सुखराम, पिंडारी, कपननी व मैकतोली जैसे कुछ प्रमुुख ग्लेशियर हैं।

उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर सबसे बड़ा है। यह चार हिमनदों रतनवन, चतुरंगी स्वच्छंद और कैलाश से मिलकर बना है। गंगोत्री ग्लेशियर 30 किलोमीटर लंबा और दो किलोमीटर चौड़ा है।  हालिया शोध में यह बात सामने आई है कि गंगोत्री ग्लेशियर पर्यावरण में आए बदलाव के चलते हर साल 22 मीटर पीछे खिसक रहा है।

जहां तक सब दूसरे सबसे बड़े ग्लेशियर का सवाल है तो पिंडारी ग्लेशियर 30 किमीमीटर लंबा और 400 चौड़ा है। यह ग्लेशियर त्रिशूल, नंदा देवी और नंदाकोट पर्वतों के बीच स्थित है। पर्यावरणीय बदलाव की वजह से फिलहाल हर साल ये ग्लेशियर कई मीटर तक पीछे खिसक रहे हैं। अतिसंवेदनशील ग्लेशियरों के टूटने, एकाएक पिघलने से उत्तर भारत में भयावह बाढ़ और तबाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।  

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उत्तराखंड की प्रमुख आपदाएं

1-भूस्खलन/हिमस्खलन
2013-केदार खरक उत्तरकाशी
2010-चमोली
2008-कालिंदी बद्रीनाथ ट्रैक चमोली
2008-गोमुख ग्लेशियर गंगोत्री के निकट उत्तरकाशी
1998-मालपा, काली नदी

2-भूकंप-1999/चमोली
1991-उत्तरकाशी

3-बादल फटने की घटनाएं
2012-रुद्रप्रयाग
2010-अल्मोड़ा/कपकोट/2009-मुनस्यारी
2008-पिथौरागढ़

4- अचानक आने वाली बाढ़
2013-केदारनाथ
2012-अस्सी गंगा, उत्तरकाशी
2010-बागेश्वर
2009-मुनस्यारी
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