जीबी पंत इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने कहना है कि आम व्यक्ति आपदा को लेकर कोई भी आकलन कर सकता है, लेकिन एक वैज्ञानिक जब तक कोई प्रमाणित डाटा न हो तब तक कोई भी राय जाहिर नहीं करेगा। कहा कि संस्थान की टीम आपदा के क्षेत्र में जाएगी और वहां पूरी मेहनत के साथ डाटा इकट्ठा करेगी। जल्द ही आपदा के सही कारणों का पता लगा लिया जाएगा। हम सभी जानकारियों पर नजर बनाए हुए हैं।
कुमाऊं विवि ग्लेशियरों पर करेगा शोध
चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से आई प्राकृतिक आपदा के बाद अब कुमाऊं विश्वविद्यालय हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर शोध कार्य करेगा। विवि इस संबंध में भू-गर्भ विज्ञान के वैज्ञानिकों के साथ एक बैठक करने जा रहा है। इसके साथ विवि ने आगामी सत्र से रिमोट सेंसिंग का कोर्स शुरू करने फैसला भी लिया है।
बता दें कि चमोली जिले में ग्लेशियर के टूटने से जो तबाही का मंजर सामने आया है उस पर पूरी दुनिया की निगाह बनी हुई है। वैज्ञानिक इसके कारणों को जानने में जुटे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी जल्द हिमालयी रीजन के ग्लेशियरों पर शोध करने का फैसला किया है। कुलपति प्रोफेसर एनके जोशी ने बताया कि उत्तराखंड से लगे संपूर्ण हिमालयी रीजन में विवि के भू-गर्भ विज्ञान के वैज्ञानिक शोध कार्य करेंगे।
इसके लिए जल्द बैठक होगी और बैठक में शोध कार्य को लेकर सुझाव तथा विचार-विमर्श किया जाएगा। हिमालयी क्षेत्र की गतिविधियों पर विशेषज्ञ ब्योरा एकत्रित कर शोध करेंगे। उन्होंने कहा कि तरह की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने के लिए दूसरे उपाय भी किए जाएंगे, ताकि भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्व में ही पता चल सके। उन्होंने बताया कि आगामी सत्र से विवि में रिमोट सेंसिंग का डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा। यहां युवाओं को आपदाओं के कारण तथा परिणाम की जानकारी दी जाएगी।