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चमोली आपदा: अध्ययन के लिए केंद्र ने गठित किए दो दल, बाढ़ में लापता एक मजदूर की हुई पहचान

Thu, 25 Mar 2021 08:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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चमोली के ऋषिगंगा-धौलीगंगा में आई आपदा के अध्ययन के लिए केंद्र सरकार की ओर से दो टीमें बनाई गई हैं। यह दोनों दल ऋषि गंगा के अपस्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में आपदा के प्रभाव का अध्ययन भी करेंगे।

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चमोली आपदा: ऋषि गंगा में एक महिला का शव मिला, अब तक बरामद हो चुके 77 शव   

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रत्येक टीम में नौ सदस्य हैं।

बताया गया कि ये दल रैणी गांव के लिए रवाना होंगे। वहां पर एक सप्ताह तक रुकने के बाद आपदाग्रस्त क्षेत्र का अध्ययन कर रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार को दी जाएगी।
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ऋषि गंगा में आई बाढ़ में लापता एक मजदूर की हुई पहचान

ऋषि गंगा में आई बाढ़ में लापता हुए एक मजदूर की शिनाख्त हो गई है। मजदूर का शव 8 फरवरी को कलियासौड़ (श्रीनगर) के समीप अलकनंदा नदी से बरामद हुआ था। मृतक की पहचान उसके भाई और साले ने पुलिस रिकार्ड में उपलब्ध फोटोग्राफ के आधार पर की। 

कोतवाल हरिओम राज चौहान ने बताया कि 72 घंटे के अंदर शिनाख्त न होने पर अज्ञात शव का दाह संस्कार कर दिया गया था। 24 मार्च को पुलिस मुख्यालय से नियुक्त विशेष दल के एसआई कृपाल सिंह व कांस्टेबल अनिल सैनी खीरी जिले (यूपी) के तरणकोटी गांव के कमल बहादुर और लक्ष्मण को नदी मेें मिले अज्ञात शवों की पहचान के लिए श्रीनगर कोतवाली लाए।

कमल ने पुलिस रजिस्टर में लगी फोटो अपने बड़े भाई शेर बहादुर पत्र खुशीराम ( जिले यूपी तरणकोटी ) की बताई।  मृतक के साले लक्ष्मण ने भी इसकी पुष्टि की। उसने बताया कि दशहरे मेले में दोनों ने अपने हाथों में पत्नियों का नाम लिखवाया था।  शेर बहादुर ऋत्विक पावर प्रोजेक्ट कंपनी तपोवन में बोल्डर के पद पर कार्यरत था।

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ऋषि गंगा में एक महिला का शव मिला 

वहीं रैणी गांव के समीप ऋषि गंगा में बुधवार को एक महिला का शव मिला। शव क्षत-विक्षत है। ऋषि गंगा की जलप्रलय में अभी तक अलग-अलग स्थानों से 77 शव और 35 मानव अंग बरामद हो चुके हैं, जबकि अभी भी 128 लोग लापता हैं। ऋषि गंगा की आपदा में कुल 205 लोग लापता हुए थे।

ऋषिगंगा पावर हाउस साइट में नहीं चलाया खोज अभियान

ऋषिगंगा की आपदा के बाद से रैणी और तपोवन क्षेत्र में चलाए जा रहे खोज अभियान पर स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऋषिगंगा पावर हाउस साइट में खोज अभियान नहीं चलाया गया, जिस कारण कई शव अभी भी मलबे में ही दबे हुए हैं।
 
रैणी गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य संग्राम सिंह और पूरण सिंह राणा का कहना है कि स्थानीय लोग शुरू से प्रशासन से इस क्षेत्र में लापता की तलाश की मांग कर रहे हैं। खोज अभियान में हो रही लापरवाही के कारण अब कुत्तों को जहां शव दिखे वह शवों को नोचने लग गए हैं।
 
वहीं, एसडीएम जोशीमठ कुमकुम जोशी का कहना है कि जहां-जहां लोगों ने कहा, वहां खोज अभियान चलाया गया। पावर हाउस साइट में दलदल था, बचाव कर्मियों की सुरक्षा को भी देखना था, इसलिए वहां अभियान नहीं चलाया।
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