दुग्ध विकास विभाग ने समितियों के माध्यम से हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, देहरादून में पशुपालकों को गाय दी है। सेना ने प्रदेश सरकार को इस शर्त पर गाय दी हैं कि डेयरी फार्म में जिस हालत में हैं, उसी हालत में सभी को लेना पड़ेगा। गायों को छांटकर नहीं दिया जाएगा। अब पशुपालक कह रहे हैं कि कई गायों की हालत बेहद खराब होने से वे दूध देने के लायक नहीं हैं। प्रदेश में वर्तमान में पांच दुग्ध सहकारी समितियां हैं। सरकार का दावा था कि सेना से 10 हजार गाय मिलने से प्रदेश में दो हजार नई डेयरी विकसित होंगी। साथ ही दुग्ध उत्पादन में एक लाख लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी होगी। जिससे पशुपालकों की आय बढ़ने के साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। वर्तमान में दुग्ध उत्पादन समितियों के माध्यम से 2.72 लाख लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादित किया जा रहा है।
कोटद्वार क्षेत्र से यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। विभागीय अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने को कहा गया है। आमतौर पर एक स्थान से दूसरे स्थान शिफ्ट करने पर गाय कम दूध देने लगती है। सेना से मिली गाय सही है। अन्य क्षेत्रों से इसका अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। यदि किसी पशुपालकों को गायों को लेकर कोई समस्या है तो वे विभाग को वापस लौट सकते हैं। इन गायों को किसी दूसरे किसान को उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग किसी भी किसान को जबरन गाय नहीं दे रहा है। सहमति पर पशुपालक गाय लेने को आगे आ रहे हैं।
- धन सिंह रावत, दुग्ध विकास एवं सहकारिता मंत्री
राज्य को सेना के इन डेयरी फार्म से मिली फ्रीजन गाय
सेना डेयरी फार्म गाय की संख्या
अंबाला 2589
जालंधर 2325
आगरा 833
बरेली 660
लखनऊ 1049
मेरठ 1489
पठानकोट 882
फिरोजपुर 917