अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा खोजे गए पृथ्वी जैसे अन्य तीन ग्रह, जिनकी पृथ्वी से दूरी 39 प्रकाश वर्ष है, जिन पर पहुंचना भी असंभव है।
इस दूरी को पार करने में अब तक के किसी भी स्पेसक्राफ्ट को कम से कम 30 हजार साल लगेंगे। लेकिन अंतरिक्ष में पाए जाने वाले उल्का पिंडो के अवशेष और वहां के वातावरण में उपस्थित कणों पर सूक्षजीवों की उपस्थिति ने परग्रही जीवन के संकेत अवश्य दिए हैं।
भारत में भी इस ओर प्रयास किए गए हैं, जिनमें उनके ही मार्गदर्शन में वैज्ञानिकों की टीम ने पृथ्वी से 41 किलोमीटर ऊपर से इकठ्ठा किए सैंपल में ऐसे तीन जीवाणुओं की खोज की है, जो पृथ्वी पर नहीं पाए जाते।
उनके द्वारा प्राप्त आंकड़े और परग्रही जीवाणुओं की खोज निश्चित ही परग्रही जीवन की खोज के बड़े संकेत हैं।
उन्होंने परग्रही सभ्यताओं की संख्या को लेकर सैद्धांतिक गणनाओं पर फ्रैं क ड्रैक के शोधों पर भी प्रकाश डाला।
ड्रैक समीकरण का उपयोग ब्रह्मांड में ऐसी सभ्यताओं की संख्या का आंकलन करने के लिए किया गया है, जो संवाद करने की क्षमता रखती है। इस मौके पर यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, प्रो. एएन पुरोहित, डॉ. बीआर अरोरा, प्रो. एमपीएस बिष्ट, डॉ. आशुतोष त्रिपाठी मौजूद रहे।