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उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में आठ प्रस्तावों पर हुई चर्चा, इन अहम फैसलों पर लगी मुहर

Wed, 26 Dec 2018 10:11 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Trivendra Singh Rawat
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान आठ प्रस्तावों पर चर्चा की गई। मंत्रिमंडल की बैठक सचिवालय में सुबह 11 बजे शुरू हुई। बैठक में उत्तराखंड खाद्य चिकित्सा संवर्ग नियमावली बनाकर 50 पद सृजित किए गए।

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विमानों के ईंधन पर दस वर्षों तक एक फीसदी वैट
हवाई सेवाओं का विस्तार कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विमानों के ईंधन पर सिर्फ एक फीसदी वैट वसूलने का निर्णय लिया है। यह सुविधा दस वर्षों तक लागू रहेगी। विमानों के ईंधन (एविएशन टरबाइन फ्यूल) पर वैट की वर्तमान दर 20 फीसदी है। राज्य सरकार ने एक झटके में 19 फीसदी वैट कम कर दिया है। केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के तहत सुगम पर्यटन आवागमन को विकसित करने की कसरत चल रही है। इस योजना के तीसरे चरण में सी प्लेन के संचालन के लिए एयरोड्रम स्थापित करने पर जोर है। इसके अंतर्गत वाटर एयरोड्रम की कनेक्टिविटी में सुधार पर भी बल दिया जा रहा है। दरअसल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी 2016 के जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर फोकस किया है। राज्य सरकारों से इसके लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई है। 

इस संबंध में मंत्रिमंडल की बैठक में विमानों के ईंधन पर एक फीसदी या इससे कम वैट वसूलने का प्रस्ताव वित्त विभाग की ओर से लाया गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि वर्तमान में राज्य में वॉटर एयरोड्रम जैसी कोई गतिविधि संचालित नहीं हो रही है, जिससे वैट के अंतर्गत राजस्व मिल रहा हो। ऐसी संभावना हो सकती है कि यदि एविएशन टरबाइन फ्यूल पर वर्तमान में प्रभारी 20 फीसदी वैट की दर को एक फीसदी तक कम किया जाए, तो इससे पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। विमानन कंपनियां उत्तराखंड का रुख करने के लिए प्रेरित होंगी। प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि यदि वाटर एयरोड्रम जैसे उद्योग समय पर प्रोत्साहन न मिलने के कारण पड़ोसी राज्यों में स्थानांतरित हो जाते हैं, इससे राज्य को हानि उठानी पडे़गी। मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव पर सहमति प्रकट करते हुए एक फीसदी वैट ही वसूलने पर मुहर लगा दी।
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सी प्लेन को आधारभूत ढांचा तैयार करने पर मुहर
टिहरी में सी प्लेन उतारने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए जो कुछ भी अपेक्षित है, राज्य सरकार उसे पूरा करेगी। कैबिनेट बैठक में बुधवार को इस पर मुहर लग गई। कैबिनेट ने टिहरी में वाटर एयरोड्रम की स्थापना, इसके बाद हवाई सेवा के संचालन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की मंजूरी दे दी। ढाई एकड़ जमीन के साथ ही जरूरी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी कैबिनेट ने अपनी सहमति दे दी है। टिहरी में आधारभूत ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया में होने वाले खर्च का 80 फीसदी केंद्र सरकार करेगी। राज्य का अंश 20 फीसदी का होगा।

कैबिनेट की बैठक में बुधवार को आए प्रस्ताव में टिहरी झील में सी प्लेन उतारने की योजना पर बात हुई। बताया गया कि टिहरी झील में में सी प्लेन के संचालन के लिए संयुक्त अध्ययन दल ने इसे उपयुक्त पाया है। भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण, महानिदेशालय नागरिक विमानन एवं स्पाइस जेट ने प्री फिजिबलिटी स्टडी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है। साथ ही अनुरोध किया है कि क्षेत्रीय संपर्क योजना के अंतर्गत तमाम गतिविधियों के लिए त्रिपक्षीय समझौता पत्र पर उत्तराखंड सरकार हस्ताक्षर करे। इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कैबिनेट ने तय किया कि टिहरी झील में वाटर एयरोड्रम की स्थापना ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की तरह की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार अब केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन गठित स्टीयरिंग कमेटी और संबंधित मंत्रालय की अनापत्ति के साथ ही भारतीय विमानन पत्तन प्राधिकरण से लाइसेंस लेने की कार्रवाई भी करेगी।

डाक्टरों को एसडीएसीपी में मिलेगी शिथिलता
सरकार ने चिकित्सकों को विशेष डायनमिक एश्योर्ड कैरियर प्रोगेशन (एसडीएसीपी) योजना के तहत एक बार शिथिलीकरण का लाभ देने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल में आए इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से डाक्टर चार, नौ, 13 और बीस वर्ष की सेवा पर अगला वेतनमान दिया जाता है। लेकिन एसजीएसीपी का लाभ चिकित्सकों को तभी मिलता है जब अनिवार्य रूप से निर्धारित समय के लिए पहाड़ में सेवाएं दी गई हों। मंत्रिमंडल के फैसले के बाद डाक्टर अपनी सेवाओं में एक बार उच्चतर वेतनमान के लिए पहाड़ की सेवाशर्तों में छूट ले सकेंगे। 

स्वास्थ्य विभाग ने एसडीएसीपी के तहत चार वर्ष की सेवाओं में दो वर्ष दुर्गम में, 9 वर्ष की सेवाओं में 5 वर्ष दुर्गम में, 13 वर्ष की सेवाओं में 7 वर्ष दुर्गम में और 20 वर्ष की सेवाओं में 9 वर्ष दुर्गम में अनिवार्य रूप से बिताएंगे, जिसके बाद ही उन्हें प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ उच्चतर वेतनमान मिलेगा। शासकीय प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक डाक्टरों ने सरकार से मांग रखी थी कि डाक्टरों की कमी के चलते कई डाक्टरों को मैदानी और सुगम क्षेत्रों से पहाड़ और दुर्गम में स्थानांतरण नहीं होता है। इसके चलते उनको उच्चतर वेतनमान नहीं मिल रहा है। सरकार ने मौजूदा प्रावधानों में किसी एक उच्चतर वेतनमान के लिए पहाड़ की अनिवार्य सेवा शर्त में शिथिलता दे दी है।

संविदा कर्मियों को सीधी भर्ती में मिलेगी छूट
संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए बनी विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली 2016 पर हाईकोर्ट की रोक के बाद सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को सीधी भर्ती में छूट को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने बुधवार को अधिमान अंक (वैटेज प्वाइंट) एवं आयु सीमा में छूट नियमावली 2018 पर मुहर लगा दी। इसका लाभ दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ पदों पर तैनात कार्मिक ले सकेंगे। रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया में उनकी एक वर्ष की सेवा के एवज में 1.5 अधिमान अंक (अधिकतम 10 अंक) मिलेंगे। यही नहीं सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए तय आयु सीमा की बाध्यता भी नहीं रहेगी।

कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
- विभिन्न विभागों से संबंधित 27 सचिवालय कार्मिकों के सेवा स्थानांतरण पर सेवा शर्तें निर्धारित करने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनी।
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ  सिंगापुर को ढाई लाख सिंगापुर डॉलर की अदायगी होगी। यह यूनिवर्सिटी देहरादून स्मार्ट सिटी एवं एमएसएमई के संबंध में अध्ययन रिपोर्ट देगी।  
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- गढ़ी कैंट पांच सितारा होटल एवं कन्वेंशन सेंटर के लिए निजी कंपनी से हुए एमओयू के तहत लिए गए 4.54 करोड़ रुपये लौटाए जाएंगे। 
- सी प्लेन के तहत ईंधन में वैट को 20 से घटाकर एक प्रतिशत किया गया।
- उत्तराखंड खाद्य चिकित्सा संवर्ग नियमावली को मंजूरी, 50 पद सृजित किए गए।
-प्रांतीय चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा कार्मिकों को उच्चतर वेतनमान में दी शिथिलता।

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