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उत्तराखंड: मंत्रिमंडल ने लिया फैसला, नगर पालिकाओं और पंचायतों में लागू होगी स्वकर व्यवस्था 

Thu, 27 Feb 2020 10:14 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • मंत्रिमंडल ने लिया फैसला, विधानसभा में आएगा विधेयक
  • भवन मालिक खुद तय करेगा कि कितना बनेगा हाउस टैक्स
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रदेश की नगर पालिकाओं और पंचायतों में गृह कर के लिए स्वकर (सेल्फ असेसमेंट टैक्स) व्यवस्था लागू होगी। मंत्रिमंडल ने स्वकर व्यवस्था के लिए एक्ट में संशोधन किया है। विधानसभा सत्र में विधेयक पारित किया जाएगा। 

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में सात प्रस्ताव आए, जिनमें से छह को मंजूरी दी गई है। सूत्रों के अनुसार, नगर निगमों की तरह अब 41 नगर पालिकाओं और 42 नगर पंचायतों में हाउस टैक्स की वसूली के लिए स्वर कर व्यवस्था रहेगी। निकायों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 

राजाजी पार्क में इको सेंसिटिव क्षेत्र तय 


राजाजी राष्ट्रीय पार्क में सरकार ने इको सेंसिटिव क्षेत्र तय कर दिया है। पार्क का कुल 819 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का 296 वर्ग किलोमीटर इसके अधीन आएगा। पार्क परिधि में आने वाले 825 गांवों में से अब केवल 22 के इको सेंसिटिव क्षेत्र के अधीन आएंगे। 

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अन्य प्रमुख फैसले 


- पशु पालन विभाग के तहत 13 जिलों में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्राइवेट गर्भाधान केंद्रों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि पर्वतीय क्षेत्रों में 50 रुपये और मैदानी क्षेत्रों में 40 रुपये होगी। 
- उत्तराखंड पंचायती राज और स्थानीय निकाय सेवा शर्तों की नियमावली को मंजूरी।
- राज्य लोक सेवा आयोग की नियमावली संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी। महाधिवक्ता को नियुक्ति प्राधिकारी बनाने की व्यवस्था वाले उपनियम में बदलाव। महाधिवक्ता को उप सचिव रैंक से ऊपर का अधिकारी नामित करने का अधिकार दिया।  
- नगर पालिका अधिनियम 2016 संशोधन विधेयक विधानसभा में लाया जाएगा। स्लाटर हाउस विहीन क्षेत्र घोषित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास होगा।

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इको सेंसिटिव जोन से 803 गांव बाहर 

राजाजी नेशनल पार्क की परिधि में आने वाले 803 गांवों को इको सेंसिटिव जोन से बाहर करने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। अब केवल पार्क क्षेत्र के 22 गांव सेंसिटिव जोन की परिधि में आएंगे। राजाजी नेशनल पार्क के चारों और बफर जोन कम करने के बावजूद कई गांव इको सेंसिटिव जोन की जद में आ रहे थे। सरकार ने जोन का नए सिरे से निर्धारण कर दिया है। मंत्रिमंडल ने माना कि इको सेंसिटिव जोन में शामिल होने वाले गांवों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंत्रिमंडल ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इसे अब केंद्र को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। 

यह गांव आएंगे दायरे में 

पार्क क्षेत्र के अंदर 20 गांव थे, जिसमें 17 बाहर किए गाए हैं। इको सेंसिटिव जोन क्षेत्र में आने वाले गांवों में सेनार, करोंदी, रत्ता पानी, फूल चट्टी और उलेला शामिल हैं। इसके अलावा 805 गांव परिधि में थे। जिसमें से डाडी, टीहरा, रायवाला गंग, भोगपुर, धौरीघाट, केशुबाड़ी, शियानी, प्रतीतनगर, चांदपुरी, धमांदा, देवराना, हजार टौंगिया, खैरगई, बुदानु, सिमल, डूंडी मौन, फुलानी चक्कू गांव जोन क्षेत्र में आएंगे। 
 
इन गतिविधियों को लिए लेनी होगी अनुमति

- इको सेंसिटिव जोन में घर बनाने या मरम्मत के लिए जमीन की खुदाई करना। 
- घर के लिए टाइल्स या ईंट का प्रयोग किया जा सकेगा। अन्य खनन गतिविधियां नहीं चलेंगी। 
- नया होटल या रिसोर्ट बनाने के लिए जोनल प्लान के तहत और पर्यावरण नियमों के तहत अनुमति। 
- जलाने की लकड़ी का प्रयोग होटल, भोजनालय, आश्रमों एवं अन्य व्यवसायिक गतिविधि के लिए प्रतिबंधित रहेगा।
- जल विद्युत परियोजना का निर्माण भी पर्यावरण के तय मानकों के अनुसार होगा। 
- रात में वाहन का उपयोग सक्षम अधिकारी की अनुमति से होगा।
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