राजाजी नेशनल पार्क की परिधि में आने वाले 803 गांवों को इको सेंसिटिव जोन से बाहर करने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। अब केवल पार्क क्षेत्र के 22 गांव सेंसिटिव जोन की परिधि में आएंगे। राजाजी नेशनल पार्क के चारों और बफर जोन कम करने के बावजूद कई गांव इको सेंसिटिव जोन की जद में आ रहे थे। सरकार ने जोन का नए सिरे से निर्धारण कर दिया है। मंत्रिमंडल ने माना कि इको सेंसिटिव जोन में शामिल होने वाले गांवों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंत्रिमंडल ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इसे अब केंद्र को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
यह गांव आएंगे दायरे में
पार्क क्षेत्र के अंदर 20 गांव थे, जिसमें 17 बाहर किए गाए हैं। इको सेंसिटिव जोन क्षेत्र में आने वाले गांवों में सेनार, करोंदी, रत्ता पानी, फूल चट्टी और उलेला शामिल हैं। इसके अलावा 805 गांव परिधि में थे। जिसमें से डाडी, टीहरा, रायवाला गंग, भोगपुर, धौरीघाट, केशुबाड़ी, शियानी, प्रतीतनगर, चांदपुरी, धमांदा, देवराना, हजार टौंगिया, खैरगई, बुदानु, सिमल, डूंडी मौन, फुलानी चक्कू गांव जोन क्षेत्र में आएंगे।
इन गतिविधियों को लिए लेनी होगी अनुमति
- इको सेंसिटिव जोन में घर बनाने या मरम्मत के लिए जमीन की खुदाई करना।
- घर के लिए टाइल्स या ईंट का प्रयोग किया जा सकेगा। अन्य खनन गतिविधियां नहीं चलेंगी।
- नया होटल या रिसोर्ट बनाने के लिए जोनल प्लान के तहत और पर्यावरण नियमों के तहत अनुमति।
- जलाने की लकड़ी का प्रयोग होटल, भोजनालय, आश्रमों एवं अन्य व्यवसायिक गतिविधि के लिए प्रतिबंधित रहेगा।
- जल विद्युत परियोजना का निर्माण भी पर्यावरण के तय मानकों के अनुसार होगा।
- रात में वाहन का उपयोग सक्षम अधिकारी की अनुमति से होगा।