हंस फाउंडेशन समेत कुछ एक संस्थाएं पूर्व में पीएचसी और सीएचसी को गोद लेने की इच्छा सरकार के सामने प्रकट कर चुकी है। कैबिनेट में इस मामले में एक मंत्री की इस रूप में आपत्ति सामने आई कि राजनीतिक उद्देश्य वाली संस्थाओं को इस मामले में दूर रखा जाना चाहिए।
एक अन्य निर्णय में धार्मिक ट्रस्ट, अखाडे़ या फिर वे जगह जहां पर संत रहते हैं, वहां हाउस टैक्स नहीं लिया जाएगा। कुछ मामलों में व्यवसायिक की जगह घरेलू दर लागू करने की बात पर सहमति बनी है।
चिट फंड कंपनियों पर कसा शिकंजा
चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए कैबिनेट ने डीएम और एसपी की भूमिका को उनकी मॉनीटरिंग से जोड़ दिया है। अब किसी भी चिट फंड कंपनी को अपना काम शुरू करने से पहले डीएम और एसपी को रिपोर्ट करनी होगी। इसके अलावा, उन्हें हर तीन महीने में डीएम और एसपी को रिपोर्ट करनी होगी।
ये भी हुए निर्णय
-प्रतिपूर्ति बगैर सीएम विवेकाधीन कोष से जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण और नवनिर्माण के लिए धनराशि जारी की जा सकेगी।
-गोवंश संरक्षण नियमावली में आंशिक संशोधन
-सिंचाई और सहकारिता विभाग की नियमावली में आंशिक संशोधन।