बृहस्पतिवार को सचिवालय में करीब तीन घंटे से अधिक देर तक चली कैबिनेट में कर्मचारियों के सारे गिले शिकवे दूर करने की कोशिश की गई।
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कैबिनेट ने न सिर्फ कर्मचारियों को उनकी हर समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिलाने की कोशिश की बल्कि हड़ताली कर्मचारियों के हड़ताल अवधि का वेतन भी समायोजित कर दिया।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था भी सरकार ने की है। रमसा और सर्व शिक्षा अभियान के तहत नियुक्तियों में तमाम गड़बड़ियों की जांच विजिलेंस से कराने का फैसला कर कैबिनेट ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और शिक्षा में सुधार का संकेत देने की कोशिश की।
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सरकार कर्मचारियों के प्रति नरम
पंचायत चुनाव, मानसून सीजन और गैरसैंण में विधानसभा सत्र से ठीक पहले हो रही इस कैबिनेट से आपदा प्रबंधन, पुनर्निर्माण, पंचायत और यात्रा तैयारी पर फोकस करने की उम्मीद थी।
पर पिछले कई दिनों से हड़ताल पर उतर आए कर्मचारियों को मनाने में ही कैबिनेट ने खासा वक्त लगाया। कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए बाकायदा दो कमेटियों का गठन करने से लेकर डेडलाइन तय करने तक करने के जरिये यह संकेत देने की कोशिश की गई कि सरकार कर्मचारियों के प्रति नरम हैं।
हालांकि पूर्ववर्ती बहुगुणा सरकार की कैबिनेट ने नो वर्क और नो पे को कैबिनेट से पारित कर सख्त होने का संकेत दिया था। कैबिनेट ने रमशा और सर्व शिक्षा अभियान में गड़बड़ नियुक्तियों की विजीलेंस जांच कराने का फैसला कर कैबिनेट ने इस समस्या से भी निजात पाने की कोशिश की। पिछले लंबे समय से नियुक्तियों को लेकर खासा बवाल होता रहा है।
फिर उठ सकता है विवाद
कैबिनेट का एक और फैसला अब पुराने विवादों को फिर से नई जमीन दे सकता है। राज्य आंदोलनकारियों, स्वतंत्रतता संग्राम सेनानियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के मसले को फिर से कैबिनेट में लाने का फैसला किया गया है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा था। हालांकि अपना बचाव करते हुए कैबिनेट सुप्रीम कोर्ट और अन्य फैसलों को ध्यान में रखकर ही प्रस्ताव लाने की बात कर रही है।
कैबिनेट ने पुनर्निर्माण पर बात न की हो पर जून 2013 की आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी में तवज्जो देने का इरादा जरूर जाहिर किया। इससे सरकार पर आपदा प्रभावितों को लेकर गंभीर न होने का आरोप कुछ हद तक कम हो सकेगा।
अर्द्धसैनिक बलों को दिया तोहफा
पूर्व सैनिकों की भांति अर्द्धसेना बलों से रिटायर जवानों व अधिकारियों को एक्स सेंट्रल फोर्सेस पर्सनल के तहत राज्य में चल रही कल्याण योजनाओं में लाभ देने के रास्ते सरकार ने खोल दिए हैं।
अर्द्ध सैनिक बल के लिए सरकार अलग व्यवस्था के लिए पहले ही प्राधिकरण बनाया है। सरकार के अर्द्ध सैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवानों व उनके आश्रितों को भी पूर्व सैनिकों की भांति ही सुविधाएं प्रभावी बनाने से एक लाख से अधिक रिटायर पैरामिलिट्री के जवानों और अधिकारियों को लाभ मिलेगा।
पूर्व सैनिकों की भांति अर्द्धसेना बलों से रिटायर जवानों व अधिकारियों को एक्स सेंट्रल फोर्सेस पर्सनल के तहत लाभ दिये जाने के लिए मंत्रिमंडल की मुहर लग गई है। अब लाभांवितों का चिन्हीकरण और ढांचा तैयार किया जाएगा।
अर्द्धसेना बलों और उनके आश्रितों को सैनिक कल्याण योजनाओं में शुमार करने के लिए केंद्र ने वर्ष 2012 में फैसला लिया था। राज्य सरकार ने केंद्र के फैसले को दिसंबर 2013 में लागू करने का फैसला लिया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व अर्द्ध सैनिक बलों के अलग प्राधिकरण बनाने का फैसला लिया गया।
राज्य सरकार अपने स्तर पर पूर्व सैनिकों के कल्याण केलिए जो योजनाएं चला रही हैं उसमें अर्द्धसेना बलों के रिटायर जवानों और अधिकारियों सहित उनके आश्रितों को हिस्सेदारी दे सकती हैं।
- उपनल के माध्यम से अब पूर्व अर्द्धसेना के आश्रित को रोजगार - पूर्व सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली छात्रवृति योजना का लाभ - पूर्व सैनिकों की बेटियों को मिलने वाली विवाह अनुदान का लाभ - 60 से 65 वर्ष तक के पुन रोजगार के पदों पर लाभ - नियमित नौकरियों में एक्ससर्विसमैन कोटे की तरह आरक्षण - सेना की भांति पुलिस गैलेंट्री पदकों हासिल करने वालों को राशि