होटल, वेडिंग प्वाइंट और रेस्टोरेंट में शराब और बीयर बार के लाइसेंस जारी करने का अधिकार अब आबकारी विभाग से हटा दिया है। बार लाइसेंस की पेचीदा प्रक्रिया को सरल बनाते हुए अब जिलाधिकारी को लाइसेंस देने का अधिकार रहेगा। लाइसेंस के रिन्युअल का अधिकार भी जिलाधिकारी के पास होगा।
एफएल 2 लाइसेंस में नहीं हुआ बदलाव
विभाग ने एफएल 2 की लाइसेंस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया है। माना जा रहा था राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार एफएल 2 का लाइसेंस बड़ी शराब कंपनी को देने की तैयारी में है। इससे दूसरे ब्रांडों को नुकसान पहुंचने की आशंका बन जाती। ऐसे में पहली की ही व्यवस्था के तहत एफएल 2 के लाइसेंस दिए जाएंगे।
35 सौ करोड़ का लक्ष्य, दुकानें नहीं बढ़ेंगी
सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए लक्ष्य 35 सौ करोड़ रुपये कर दिया है, लेकिन दुकानों की संख्या नहीं बढ़ाई है। लाटरी के अलावा अगर कोई व्यवसायी दुकान के मौजूदा राजस्व में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव देता है, तो उसे दुकान दे दी जाएगी। किन्हीं कारणों से अगर दुकान नहीं बिकती है, तो विभाग ने दुकान को दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लाटरी निकालने का विकल्प भी रखा है।
सरकार के शराब के रेट घटाने का असर सेना की सीएसडी कैंटीनों पर भी दिखेगा। प्रदेश में शराब के दाम बढ़ने से पूर्व सैनिकों को भी अन्य राज्यों से मंहगी शराब खरीदनी पड़ रही थी।
कहीं भी मद्य निषेध क्षेत्र घोषित कर सकेगी सरकार
मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम 1910 में संशोधन किया है। अधिनियम की धारा 37 (क) की उपधारा तीन को समाप्त कर दिया गया है। इसके तहत यह तय था कि स्कूल, कालेज, सरकारी दफ्तर, मंदिर आदि के पास दुकान नहीं खोली जा सकती।
संशोधन के बाद सरकार तय स्थानों स्कूल, कालेज, मंदिर और कार्यालयों आदि के अलावा सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों से कहीं भी मद्य निषेध (शराब की बिक्री प्रतिबंधित) लागू कर सकती है। इस संशोधन को हाईकोर्ट के मद्य निषेध नीति तैयार करने के बाद पारित किया गया।