प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालय अब एक कानून से चलेंगे। कैबिनेट बैठक में सभी विवि के लिए एक कानून पर मुहर लग गई है। इसके लिए अध्यादेश लाया गया है। सरकार ने सभी विवि में कुलपति, कुलसचिव की नियुक्तियों से लेकर कई नियमों में आंशिक संशोधन किए हैं।
कानून के तहत अब प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति की सेवानिवृत्ति की आयु 70 वर्ष होगी। पहले यह 65 वर्ष थी। हालांकि यूजीसी ने केंद्रीय विवि में पहले ही कुलपति की रिटायरमेंट आयु 70 वर्ष की हुई है। कुलपतियों के कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने की सूरत में भी भी नियम बदले गए हैं।
अब किसी भी राज्य विवि में अगर कोई कुलपति अपने कार्यकाल के बीच में छोड़कर जाते हैं तो बाहर से कोई भी कार्यवाहक कुलपति नहीं लाया जाएगा। इसके बजाए उसी विवि के सीनियर प्रोफेसर को कुलपति की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दूसरी ओर, कुलसचिव के पदों के लिए भी कैडर बनेगा। इसके तहत 50 प्रतिशत कुलसचिव के पद प्रमोशन से भरे जाएंगे जबकि 50 प्रतिशत पद सीधे लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे।
यह विवि अब एक कानून से चलेंगे
- कुमाऊं विवि
- उत्तराखंड संस्कृत विवि
- उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि
- श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि-सोबन सिंह जीना विवि, अल्मोड़ा-दून विश्वविद्यालय
- उत्तराखंड आयुर्वेद विवि
- दून विश्वविद्यालय
- हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि
- उत्तराखंड तकनीकी विवि
- जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि
वर्ष 1973 के बाद पहली बार प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालयों के लिए हम अंब्रैला एक्ट लेकर आए हैं। इस एक्ट के तहत अब सभी विवि में एक जैसे नियम लागू होंगे। अभी तक अलग-अलग नियमों की वजह से विवि का सिस्टम चलाने में परेशानी आती थीं।
- डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री