कई उद्योगों को 12.50 एकड़ से अधिक भूमि चाहिए
सरकार को यह कदम इंवेस्टर्स समिट के बाद निवेशकों के आए प्रस्ताव के चलते उठाना पड़ा है। समिट के बाद प्रदेश सरकार से निवेशक 1.24 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन कर चुके हैं, लेकिन निवेश की राह में सबसे बड़ी अड़चन प्रदेश में भूमि की उपलब्धता मानी जा रही है। सरकार भूमि खरीद कानून को शिथिल करके उद्योगों के लिए रास्ता खोलना चाहती है।
पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते निवेशक
प्रदेश सरकार ने निवेशकों को पहाड़ चढ़ाने के लिए बेशक भूमि पर लगी सीलिंग हटाने का फैसला लिया है, लेकिन ज्यादातर निवेशकों की रुचि पहाड़ के बजाय राज्य के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल की तराई में उद्योग स्थापित करने की है। उद्योग विभाग में इज ऑफ डूईंग बिजनेस के तहत एक खिड़की व्यवस्था में भी कई प्रस्ताव इसलिए लंबित हैं कि उन्हें 12.50 एकड़ से अधिक भूमि खरीदने की अनुमति चाहिए।