विद्यार्थियों को डिग्री के साथ रोजगार बाजार की जरूरत के अनुरूप व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य युवाओं को नौकरी पाने के साथ स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए तैयार करना भी है।
उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और उन्हें उद्यमिता से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी है। योजना का लाभ राज्य के राजकीय, अशासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा।
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धामी कैबिनेट में आए प्रस्ताव के अनुसार, विद्यार्थियों को डिग्री के साथ रोजगार बाजार की जरूरत के अनुरूप व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य युवाओं को नौकरी पाने के साथ स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए तैयार करना भी है। योजना पर अगले पांच वर्षों में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार तेजी से बदलते रोजगार बाजार में पारंपरिक डिग्री के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी जरूरी है।
योजना से विद्यार्थियों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के मुताबिक, शुरुआत में राजकीय और अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को इसका लाभ दिया जाएगा।
एआई, ड्रोन और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण
कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, वेब डेवलपमेंट, ड्रोन तकनीक, ब्रांड डेवलपमेंट, डिजिटल मार्केटिंग और बैंकिंग जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम के तहत कृषि जागरूकता, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन, शिल्प एवं वस्त्र, ईको-पर्यटन एवं विरासत, उद्यमिता और योग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।