उत्तराखंड कैबिनेट के फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे
- फोटो : हफिंगटन पोस्ट
स्थानीय निकायों के सीमा विस्तार को मंजूरी देने संबंधी उत्तराखंड कैबिनेट के फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। निकायों के विस्तार से शहरी इलाका बढ़ेगा और शहरी आबादी में लगभग सात फीसदी इजाफा होगा।
यह आबादी न केवल राज्य की जीडीपी बढ़ाने में अहम रोल अदा करेगी, बल्कि इससे बड़ी संख्या में रोजगार पनपेंगे और क्वालिटी ऑफ लाइफ भी बेहतर होगी। राज्य में अभी कुल 30 फीसदी शहरी आबादी है। मगर यह तादाद राजस्व में 70 फीसदी का योगदान करती है।
बुधवार को कैबिनेट में जिन 35 निकायों की सीमा का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है, उसके धरातल में आने के बाद राज्य में शहरी आबादी बढ़कर 37 फीसदी हो जाएगी। जानकारों के मुताबिक देश के जीडीपी का 60 फीसदी हिस्सा सर्विस सेक्टर से आता है।
लगभग 40 फीसदी निर्माण और 10 फीसदी कृषि क्षेत्र का योगदान जीडीपी में होता है। सर्विस सेक्टर सबसे ज्यादा शहरी इलाकों में पनपता है। फिर चाहें वो हेयर सैलून हो, रेस्टोरेंट हों या फिर शॉपिंग स्टोर। सर्विस सेक्टर बढ़ने का सीधा असर जीडीपी पर होता है। इससे प्रति व्यक्ति आय में भी इजाफा होता है और रोजगार में खासी बढ़ोत्तरी होती है।
शहरी इलाका बड़ा करने की जरूरत
केंद्र की ज्यादातर योजनाएं शहरी क्षेत्रों के लिए बनाई जाती हैं
देश के प्रमुख राज्य जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु आदि में शहरी क्षेत्र लगभग चालीस फीसदी है और ये राज्य जीडीपी के मामले में सबसे ऊपर आते हैं। वहीं बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों में शहरी क्षेत्र लगभग 20 फीसदी ही है। शहरी आबादी बढ़ने से जीवन स्तर यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ भी बेहतर होती है, क्योंकि शहर में पानी, बिजली, सड़क, सीवर, ट्रांसपोर्ट आदि सुविधाएं देने में खर्च भी कम आता है।
इसके अलावा केंद्र की ज्यादातर योजनाएं शहरी क्षेत्रों के लिए बनाई जाती हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत, जेएनएनयूआरएम, मेट्रो आदि सभी इसका उदाहरण हैं। शहरी क्षेत्र बढ़ेगा तो केंद्र की तमाम अन्य योजनाओं का फायदा भी मिलना तय है। यही नहीं तमाम शोध बताते हैं कि जब व्यक्ति पास-पास रहते हैं तो तमाम नए आइडिया भी आते हैं। ज्यादातर स्टार्ट अप्स भी शहरी इलाकों से सामने आने की बात निकलकर आई है।
शहरी इलाका बढ़ने से न केवल रोजगार के नए अवसर सामने आते हैं, बल्कि राजस्व में भी खासी बढ़ोत्तरी होती है। इसके अलावा शहरों में रहने वालों का जीवन स्तर भी निश्चित रूप से बेहतर होता है।
- अमित नेगी, सचिव (शहरी विकास)
देहरादून जैसे शहरों में आबादी का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शहरी इलाका बड़ा करने की जरूरत है। यह नियोजित विकास में मददगार साबित होगा और अवैध बस्तियां बसने पर रोक लगेगी।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री (शहरी विकास)