मई माह के दौरान भी शराब की बिक्री पुरानी आबकारी नीति के आधार पर होगी। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पुरानी आबकारी नीति को ही फिर से एक माह के लिए बढ़ाए जाने का फैसला लिया गया। नई आबकारी नीति अब कैबिनेट की अगली बैठक में लाई जा सकती है।
विधानसभा चुनाव की वजह से प्रदेश की नई आबकारी नीति तैयार नहीं हो सकी थी। पुरानी आबकारी नीति 31 मार्च को समाप्त हो रही थी। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने अप्रैल माह के लिए पुरानी आबकारी नीति बढ़ा दी थी।
प्रावधान किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शराब की जो दुकानें शिफ्ट हुई है उनके राजस्व में पांच फीसदी और शिफ्ट नहीं होने वाली दुकानों के राजस्व में 25 फीसदी की वृद्धि की जाए।
तमाम कोशिशों के बाद भी आबकारी विभाग के अधिकारी शराब की दुकानों को शिफ्ट कराने में सफल नहीं हुए हैं और विभाग को राजस्व के मद में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया जा रहा था कि नई आबकारी नीति मई महीने से लागू हो जाएगी।
बुधवार को कैबिनेट की मीटिंग में नई आबकारी नीति लाने की पूरी तैयार थी, लेकिन ऐन मौके पर सरकार ने अपने कदम पीछे खिंच लिए। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि शराब की दुकानों के शिफ्ट नहीं से सरकार चिंतित है।