योग व प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय बनेगा
नीति में योग व प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना करने का प्रावधान किया गया। जो नीति के संचालन, नियमन, अनुदान वितरण और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी करेगा। निदेशालय में एक निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, योग विशेषज्ञ, रजिस्ट्रार और अन्य आवश्यक स्टाफ शामिल होंगे। निदेशालय का कार्य योग केंद्रों की गुणवत्ता, पंजीकरण और योग प्रमाणन बोर्ड से मान्यता प्राप्त करना, योग केंद्रों की रेटिंग प्रणाली बनाना के साथ ही एमओयू के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना होगा।
पांच साल में सब्सिडी पर 35 करोड़ होंगे खर्च
प्रदेश सरकार योग नीति में दी जाने वाली सब्सिडी पर पांच साल में 35 करोड़ खर्च करेगी। इसमें योग केंद्रों के लिए 25 करोड़, अनुसंधान के लिए एक करोड़, शिक्षक प्रमाणन के लिए 1.81 करोड़ और मौजूदा संस्थानों में योग सत्रों के लिए संचालन में सहयोग पर 7.5 करोड़ के व्यय का अनुमान है। नीति की समीक्षा व निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य समिति का गठन किया जाएगा। योग सर्टिफिकेशन बोर्ड की प्रमाणन परीक्षा में सफल रहने वाले योग अनुदेशकों को परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति की जाएगी। हर साल 500 योग अनुदेशकों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही 10 हजार योग अनुदेशकों को होटल व होमस्टे में रोजगार मिलेगा।
योग नीति को मंजूरी मिलने से उत्तराखंड योग व वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। नीति में निवेश, शोध, प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया।
- दीपेंद्र चौधरी, सचिव आयुष