जेलों में कैदियों के वर्गीकरण में अब पारदर्शिता आएगी। कैबिनेट ने उत्तराखंड कारागार (संशोधन) नियमावली- 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत नए कानून लागू होने के बाद अब केवल उसी व्यक्ति को अभ्यस्त अपराधी माना जाएगा जिसे कम से कम तीन अलग-अलग समय में कारावास हो चुका है।
यही नहीं इनमें से भी कोई सजा उच्च न्यायालय ने रद्द न की हो। यह सजा उत्तर प्रदेश अभ्यस्त अपराधी प्रतिरोध अधिनियम 1952 की अनुसूची में दर्ज अपराधों के लिए होना अनिवार्य है। इस नियमावली का मुख्य उद्देश्य जेल नियमावली में अभ्यस्त अपराधी की परिभाषा को अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनाना है। सरकार ने यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में लिया है। गत मार्च में गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र में इस एक्ट को पास किया गया था।
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जेलरों के लिए अलग से नियमावली को भी मंजूरी
कारागार से संबंधित कैबिनेट में बृहस्पतिवार को एक और नियमावली को मंजूरी मिली है। कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखंड की संरचना में अधीनस्थ जेलरों के कुल 14 पद सृजित हैं जो स्थायी डिप्टी जेलरों की पदोन्नति से भरे जाते हैं। वर्तमान में कारागार विभाग में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जेल कारागार कार्यपालक अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 1980) 2002 लागू है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद कारागार विभाग में अलग से जेलर सेवा नियमावली को लागू नहीं किया गया है। विभागीय और कर्मचारी हित में उत्तराखंड कारागार कारापाल अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
शराब पर दोहरा शुल्क नहीं अब केवल वैट
भारत में निर्मित शराब पर दोहरे शुल्क के संबंध में भी कैबिनेट ने निर्णय लिया है। अभी तक वर्तमान नीति में होलोग्राम के साथ वैट भी वसूला जा रहा था। इस दोहरे शुल्क को खत्म करते हुए केवल वैट ही वसूला जाएगा। होलोग्राम शुल्क को खत्म करने का निर्णय कैबिनेट की बैठक में हुआ है। हालांकि, इससे शराब के दामों में कोई अंतर नहीं होगा। इसके अलावा आयातित शराब पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।