लिव-इन रिलेशनशिप पर कड़ा रुख, सात साल की सजा
अध्यादेश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी के माध्यम से लिव-इन संबंध स्थापित करता है तो उसे सात साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा होगी। धारा 380(2) के उल्लंघन जैसे खून के रिश्तों या प्रतिबंधित श्रेणियों में लिव-इन में रहने पर भी सात साल की जेल का प्रावधान है। किसी वयस्क द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर छह माह की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। लिव-इन संबंध समाप्त होने पर अब निबंधक की ओर से दोनों पक्षों को निर्धारित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति महानिबंधक के पास होगी। हालांकि इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।