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Uttarakhand: पहचान छिपाकर शादी की तो जेल, लिव-इन के भी नियम कड़े; लागू हुआ UCC संशोधन अध्यादेश

Tue, 10 Mar 2026 06:48 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को और अधिक प्रभावी और सख्त बनाने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बजट सत्र में पेश होने के बाद अब प्रदेश में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू हो गया है।
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Uttarakhand UCC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में अब पहचान छिपाकर शादी करने वालों को जेल होगी। वहीं, लिव-इन के नियम भी कड़े हो गए हैं। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू हो गया है।

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समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को और अधिक प्रभावी और सख्त बनाने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश को मंजूरी के साथ ही राज्य में विवाह, पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं।

अब यदि विवाह का कोई भी पक्षकार अपनी पहचान के विषय में गलत जानकारी देता है तो इसे विवाह शून्य करने का आधार माना जाएगा। इसके साथ ही, अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर शादी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अब भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।

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लिव-इन रिलेशनशिप पर कड़ा रुख, सात साल की सजा

अध्यादेश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी के माध्यम से लिव-इन संबंध स्थापित करता है तो उसे सात साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा होगी। धारा 380(2) के उल्लंघन जैसे खून के रिश्तों या प्रतिबंधित श्रेणियों में लिव-इन में रहने पर भी सात साल की जेल का प्रावधान है। किसी वयस्क द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर छह माह की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। लिव-इन संबंध समाप्त होने पर अब निबंधक की ओर से दोनों पक्षों को निर्धारित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति महानिबंधक के पास होगी। हालांकि इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।

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