48 फीसदी से ज्यादा बजट वेतन, पेंशन ब्याज पर खर्च
बजट का करीब 48.86 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, मजदूरी व पेंशन के अलावा पिछले सालों में लिए कर्ज के ब्याज की अदायगी पर खर्च होगा। कर्मचारियों के वेतन पर 17350.21 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि पेंशन मद में 6703.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए पूरे साल में सरकार 6017.85 करोड़ रुपये व्यय करेगी।
कोई कर नहीं लगाया
सरकार ने बजट में कोई नया कर नहीं लगाया है। इस लिहाज से बजट करमुक्त है। बजट में राजस्व घाटे का अनुमान भी नहीं है। अलबत्ता 8503.70 करोड़ रुपये राजकोषीय घाटा का अनुमान है, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत बताया गया है।
61 पेज का भाष सवा दो घंटे में पढ़ा
वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 61 पेज के बजट भाषण को करीब सवा दो घंटे में पूरा किया। बजट में पांच जगहों पर कविताओं के जरिये बात कही गई है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कदम मिलाकर चलना होगा कविता से बजट का समापन किया।
सरकार को राजस्व आय का यह है अनुमान
63774 करोड़ रुपये कुल राजस्व प्राप्त होगा
21452.76 करोड़ केंद्र पोषित योजनाओं से आएंगे
51474.7 करोड़ रुपये राजस्व आय की उम्मीद
24500.72 करोड़ स्वयं के कर राजस्व से प्राप्त होंगे
5520.79 करोड़ की आय खुद के प्रयासों से मिलेगी
यह बजट हमारा संकल्प है। सर्व स्पर्शी और सर्वग्राही है। इसमें सबके साथ संवाद करके जन-जन का बजट बनाने का प्रयास किया है। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड दशक होगा। उस दशक को बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। चुनाव दृष्टिपत्र के संकल्पों को पूरा करने वाला बजट भी है। -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का बजट आम जनता का उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने वाला है। यह बजट नहीं हमारा संकल्प है। सबके साथ संवाद के माध्यम से इसे जन-जन का बजट बनाने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप 21 वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने में यह बजट शानदार प्रयास है। बजट हर प्रकार से हमारे दृष्टिपत्र के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। डबल इंजन की सरकार का ही असर है कि जहां 2012 से 2017 के बीच हमें प्रतिवर्ष वार्षिक अनुदान 5615 करोड़ प्राप्त होता था।
वही 2017 से 2022 के डबल इंजन युग में औसत वार्षिक अनुदान राशि बढ़कर 11168 करोड़ हो गई है। जो कि डबल इंजन के दौर में डबल राशि है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के लिए 25 करोड़, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम व ग्रामीण कौशल योजना के तहत कुल 195 करोड़ की इस बजट में व्यवस्था की गई हैं। समान नागरिक संहिता, सुशासन व पुलिस एवं राजस्व पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए इस बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 35 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया।
गौवंश संरक्षण के लिए गौ सदनों की स्थापना को बजट में छह गुना वृद्धि की गई। संकल्प पत्र के अनुसार तीन मुफ्त गैस सिलिंडर के लिए 55 करोड़ की व्यवस्था की गई। उत्तराखंड दुर्गम हिमालयी राज्य होने के नाते रोपवे परियोजनाएं हमारे लिए अति महत्वपूर्ण हैं। अभी सात रोपवे परियोजनाओं की प्रक्रिया चल रही है। इसके अतिरिक्त 35 नई परियोजनाओं को हम पर्वतमाला परियोजना में लेकर आ रहे हैं। नगरीय निकायों के बजट में लगभग 243 करोड़ और त्रिस्तरीय पंचायतों के बजट में लगभग 190 करोड़ की वृद्धि की गई है।
पुरानी योजनाओं पर फोकस
- टिहरी झील परियोजना, बागवानी विकास योजनाओं पर काम होगा।
- किसानों की आय बढ़ाने को 771 करोड़ की रूरल इंटरप्राइजेज अक्सेलरेशन प्रोजेक्ट पर काम।
- देहरादून व मसूरी के लिए परिवहन अवस्थापना योजना।
- हल्द्वानी में एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास योजना।
- जाइका की उत्तराखंड शहरी जल आपूर्ति परियोजना।
पांच साल में केंद्र ने दिए 55841 करोड़
वित्त मंत्री के अनुसार, पिछले पांच साल में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड विभिन्न विकास योजनाओं में 55841 करोड़ का अनुदान दिया। जबकि 2012-13 से 2016-17 तक केंद्र से 28075 करोड़ रुपये का ही अनुदान मिला। यह कांग्रेस सरकार का कालखंड था।
निर्माण कार्यों पर अधिक धनराशि खर्ची
वित्त मंत्री महालेखाकार के आंकड़ों के जरिये बताया कि 2012-2017 में 21364 करोड़ रुपये की धनराशि पूंजीगत खर्च यानी निर्माण कार्यों पर हुई। इसकी तुलना में 2017-2022 तक 31164 करोड़ रुपये खर्च किए गए जो, 45.87 फीसद अधिक हैं।