रावत के मुताबिक मोहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली से दौलताबाद राजधानी ले जाने का फैसला किया और सारा तामझाम लेकर निकल पड़ा। अच्छा कदम था, मगर व्यावहारिक नहीं था। इसके बावजूद तुगलकी फरमान अमर हो गया। मैं भी अमर हो जाता। मैं कमतर ही सही, गैरसैंण का जागरिया (देवों का आह्वान करने वाला) हूं। जागर लगाता ही रहूंगा।
सरकार गिराने को लेकर किशोर ने आगाह किया था
रावत ने लिखा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि गैरसैंण के दो विधानसभा सत्रों के दौरान वे सरकार गिराने की पुष्ट जानकारी से बेखबर रहे। किशोर उपाध्याय (उस समय पार्टी प्रदेश अध्यक्ष) ने उन्हें आगाह भी किया था, लेकिन उन्होंने सोचा कि ऐसा पाप कोई क्यों करेगा।
मैं उत्तराखंड कांग्रेस का निलंबित सिपाही
असम के लिए रवाना होने से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और असम प्रभारी हरीश रावत ने ट्वीट कर खुद को उत्तराखंड कांग्रेस का निलंबित सिपाही बताया है। रावत ने लिखा, ‘मैं उत्तराखंड कांग्रेस का निलंबित सिपाही हूं और असम कांग्रेस का नियमित सिपाही’। इसके साथ ही रावत ने लिखा कि उन्हें तुरंत असम जाना पड़ रहा है और उत्तराखंड के कार्यक्रमों में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।