चटक धूप, सर्द हवा, आसपास की पहाड़ियों पर छितराई बर्फ और बादलों के बीच भराड़ीसैंण पहुंची सरकार और विपक्ष नूरा कुश्ती में उलझ गए। गैरसैंण को राजधानी के रूप में देखने की हसरत को लेकर विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों का कूच कानून व्यवस्था का सवाल बन कर रह गया।
सत्ता की चहल पहल ने भराड़ीसैंण में पसरे लंबे सन्नाटे को तोड़ डाला है। लेकिन सत्ता की रौनक में जनता की आकांक्षाएं राजधानी का सपना देख रही हैं। हर जुबान पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का सवाल है। उधर, सुदूर देहरादून से सरकारी लश्कर में शामिल मंत्री, विधायक, विधानसभा के कर्मचारी विधानसभा के भव्य और आलीशान इमारत के सामने खड़े होकर सेल्फी ले रहे हैं।
वे विधानभवन की वास्तुकला पर मुग्ध हैं और तस्वीरों में इन यादों को समेट लेने चाहते हैं। शायद गैरसैंण पहुंचने का यह मकसद यह भी है।