सदन में माइक से निकली आवाज इतनी गूंज रही थी कि किसी को भी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या बोला गया। हालत ये थी कि विधानसभा अध्यक्ष को साउंड सिस्टम संभाल रहे कर्मियों से व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश देने पड़े। बावजूद इसके हालात नहीं सुधरे।
एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा कहावत उस समय हकीकत में बदली जब लोगों ने पीने के लिए पानी की तलाश करनी शुरू की। प्लास्टिक पर प्रतिबंध के कारण विधानसभा में पानी की प्लास्टिक की बोतलें हटा दी गई थी।
सरकार का दावा था कि यहां आरओ का पानी मिलेगा लेकिन लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिला। अफसरों के लिए अलग से आरओ, चाय, काफी का इंतजाम किया गया है। इससे सदन की कार्रवाई देखने आए दूरदराज के लोगों को एक गिलास पानी के लिए भटकना पड़ा।
भराड़ीसैंण तो छोड़िए आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क न होने से लोग खासे परेशान दिखे। किसी भी मोबाइल नेटवर्क का सिग्नल नहीं आने से लोगों की बात नहीं हो पा रही थी। राहत सिर्फ इतनी थी कि विधान भवन के अंदर वाई फाई कुछ हद तक काम कर गया।