त्रिवेंद्र सरकार का पांचवा बजट ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) विधानसभा में पेश होने जा रहा है। उनके कार्यकाल के आखिरी बजट को चुनावी बजट की मिसाल दी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार के बजट में वह हर वर्ग को कोई न कोई सौगात जरूर देंगे। लेकिन बड़ा प्रश्न यही है कि बजट में किए जाने वाले लोकलुभावन वादों को पूरा करने के लिए सरकार धन कहां से जुटाएगी?
दरअसल, सीमित आर्थिक संसाधनों वाले उत्तराखंड का आधे से अधिक बजट तो कर्मचारियों व पेंशनरों के वेतन, पेंशन और भत्तों पर खर्च हो जाता है। बाकी की बड़ी राशि पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने पर खर्च होती है।
ऐसी स्थितियों में सरकार के पास अवस्थापना विकास और नई लोकहित और कल्याण की नई योजनाओं को शुरू करने के लिए सीमित मात्रा में धनराशि होती है। वर्ष 2017-18 से लेकर अब तक पेंशन, वेतन, कर्ज के ब्याज की वापसी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन आय के संसाधन जुटाने में सरकार को खासा पसीना बहाना पड़ रहा है।
कमान संभालने के दिन से ही वित्तीय प्रबंधन की चिंता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सत्ता की कमान संभालने के बाद सबसे पहले ही राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर बैठक की थी। इससे राज्य के वित्तीय हालातों को लेकर उनकी चिंता का पता चला था। सरकार का पहले दिन से एक ही संकल्प था कि वह अपने आय के संसाधनों को बढ़ाएगी।
सरकार ने आबकारी, खनन, पर्यटन, इको टूरिज्म, स्टांप और डयूटी में आय बढ़ाने के लिए नीतियों में बदलाव तक किए। लेकिन जब वह सुधार की ओर बढ़ती दिख रही थी तो कोविड-19 महामारी ने सब चौपट कर दिया। बहुत मुश्किल से राज्य की अर्थव्यवस्था संभली है, लेकिन पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाई है।
खर्च घटेगा नहीं, आय बढ़ानी होगी
वित्त विभाग के आंकड़े कहते हैं कि वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज की अदायगी का खर्च कभी घटने वाला नहीं है। ऐसे मे सरकार के पास विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए अपनी आय बढ़ानी होगी।
सरकार का सालाना राजस्व व्यय
वर्ष - बजट - वेतन/पेंशन/ब्याज प्रतिशत
2016-17 - 35609 - 46.23
2017-18 - 42,725 - 47.14
2018-19 - 45585 - 52.70
2019-20 - 48663 - 57.26
2020-21 - 53526 - 55.50