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Uttarakhand Budget 2021: अमर उजाला वेबिनार से जुड़े विशेषज्ञ के दिलों में शिकवा तो लबों पर दिखी हंसी 

Fri, 05 Mar 2021 12:17 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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फूड इंडस्ट्री के समन्वयक अनिल मारवाह - फोटो : अमर उजाला
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बजट के फौरन बाद जब अमर उजाला ने वेबिनार में विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को त्वरित विश्लेषण के लिए बुलाया तो मिली-जुली तस्वीर उभरी। कुछ ने शिकवे परोसे तो कुछ ने शाबासी दी। किसी को महंगे डीजल पर मरहम की उम्मीद थी। किसी को बिजली के फिक्स चार्ज में राहत की। उन्होंने उम्मीद टूटने का उलाहना दिया। मगर ऐसे भी विशेषज्ञ थे, जिन्होंने घाटे से परहेज रखने पर राज्य सरकार की पीठ थपथपाई। त्रिवेंद्र रावत सरकार के चुनावी बजट पर आयोजित इस वेबिनार की कुछ झलकियां पेश हैं...

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कृषि को पुचकारा, उद्योगों को भूले
पीएचडी चेंबर ऑफ कामर्स के पूर्व अध्यक्ष राजीव घई ने कहा कि यह बजट ऐसे समय में पेश किया गया है, जब कोरोना महामारी के कारण पर्यटन, उद्योग, इंडस्ट्री पूरी तरह से प्रभावित हुई। बजट में पूरी तरह से कृषि के विकास को बेस बनाकर पेश किया गया है। लेकिन इंडस्ट्री और पर्यटन को कुछ नहीं दिया गया है। जब तक कृषि, पर्यटन, फूड और उद्योगों को आपस में नहीं जोड़ा जाता, तब तक किसी एक का विकास नहीं हो सकता है और इनकम डबल नहीं हो सकती है। छोटे उद्योग कोरोना की वजह से काफी प्रभावित हुए।

उन्हें उम्मीद थी कि बजट में सरकार बिजली सहित अन्य टैक्सों में पचास प्रतिशत तक छूट देगी, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं दिया है। हालांकि उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। प्रदेश सरकार उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए कुछ काम करेगी। टूरिज्म सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए गए हैं। हालांकि मुजफ्फरनगर रेलवे लाइन के लिए 70 करोड़ घोषणा की गई है। अन्य योजनाओं के लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार को बंद हो चुके उद्योगों के लिए भी कुछ करने की जरूरत है।
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बजट संतुलित, मगर इंडस्ट्री पर मरहम नहीं
फूड इंडस्ट्री के समन्वयक अनिल मारवाह ने कहा कि बजट संतुलित है, लेकिन अगर मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता तो बजट और इफेक्टिव होता। डीजल की लागत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिससे महंगाई बढ़ती जा रही है। अगर बजट में सरकार डीजल पर वैट को कम करने की घोषणा करती तो काफी राहत मिलती। 
बजट में सरकार ने फार्मा सिटी बनाने की बात कही है। जो काफी अच्छी बात है। स्वरोजगार की दिशा में भी सरकार ने कुछ घोषणाएं की हैं। जिसमें सोलर प्लांट में सौ प्रतिशत फाइनेंस स्कीम शामिल है। लेकिन मौजूदा उद्योगों को बजट में कोई खास फायदा नहीं मिल पाया है। सिंगल विंडो को और सशक्त करने की जरूरत है। जीएसटी के बहुत इश्यू पेंडिग है। हालांकि यह केंद्र का विषय है, लेकिन इसके लिए राज्य में प्लेटफार्म की जरूरत है। चुनाव के मद्देनजर सरकार पेट्रोल, डीजल के दामों में कमी की घोषणा कर सकती थी। कुछ टैक्स में रियायत दी जा सकती थी, जिससे कि आम लोग कुछ राहत महसूस करते। ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

बजट से आम जनता को होगा फायदा
नियोजन विभाग के सीईओ मनोज पंत का कहना है कि कोरोना काल के दौरान बहुत चीजें प्रभावित हुई है। इससे हर सेक्टर चाहे वह पर्यटन हो, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर हो या कोई और, प्रभावित हुआ है। इनसे कोई आय नहीं पाई। इसके बाद भी सरकार ने संतुलन साधते हुए बिना राजस्व घाटे का बजट पेश किया है। इसका असर भविष्य में जरूर दिखाई देगा।  बजट में एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री, स्थानीय स्तर और शहरी और ग्रामीण योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार की बात भी कही गई है। विभागीय बजट में भी काफी प्रावधान किए गए हैं। बजट पूरी तरह से सतुंलित है। जो घोषणाएं और योजनाएं घोषित हुई हैं, उनका ठीक तरह से क्रियान्वयन किया जाता है तो इसका फायदा अवश्य मिलेगा। बजट का करीब साठ प्रतिशत हिस्सा, ऋण अदायगी, पेंशन, सैलरी, आदि में चला जाता है। बाकी बचे बजट को अगर सही प्लानिंग से खर्च किया जाए तो इसका लाभ जनता को अवश्य मिलगा। 
                
बजट में पर्यावरण के प्रति नहीं दिखी संवेदनशीलता
पर्यावरणविद् अजय रावत का कहना है कि बजट संतुलित भी है और लोक लुुभावना भी। लेकिन बजट में सरकार पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई दी। बजट में पर्यावरण के लिए जो कुछ होना चाहिए, वह नहीं हो पाया है। जबकि उत्तराखंड पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। नैनीताल झील और टिहरी डैम में सीप्लेन उतारने की बात की जा रही है। जिसके काफी दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। जंगलों के बीच से रोपवे बनाए जा रहे हैं। इससे वनों को नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही पर्यटन और रोजगार बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया गया। तराई भावर और पर्वतीय क्षेत्र आपदा से पीड़ित है। लेकिन बजट में सोशल सिक्योरिटी की बात नहीं की गई है। राज्य के तराई और पर्वतीय क्षेत्र आपदा से पीड़ित हैं। उन्हें बजट से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें तो केवल अपनी जान बचानी है। सड़कें बन रही हैं तो ठेकेदार उनका मलबा नदियों में फेंक रहे हैं। जिससे नदियों का स्वरूप बदल रहा है। इसलिए सरकार को विशेषतौर पर पर्यावरण पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा कोई विकास नहीं होना चाहिए, जिससे आम जनता प्रभावित हो। विकास के साथ ही सरकार को सोशल सिक्योरिटी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विपरीत परिस्थितियों के बीच अच्छा बजट
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में विपरीत परिस्थितियां चल रही हैं। उसके बाद भी सरकार की ओर से जो बजट पेश करने का प्रयास किया गया है वह सराहनीय है। प्रदेश के पास संसाधन सीमित हैं। सीमित संसाधनों के बीच बजट में जो सामंजस्य बिठाया गया है, वह अच्छा प्रयास है।
प्रदेश में बड़ी समस्या पलायन और बेरोजगारी की है। बजट में इस पर विशेष फोकस रखा गया है। जरूरत इस बात की है कि योजनाओं के लिए जो धनराशि स्वीकृत की गई है, उसको नियोजित ढंग से खर्च किया जाए। कहा कि बजट में सरकार ने पहाड़ के विकास के लिए नई कमिश्नरी की घोषणा की है। विश्वविद्यालयों को कंप्यूटर देने की बात कही है। नई लोकल बॉडी के लिए पैसा दिया गया है। गैरसैंण के विकास के लिए जल्द ही टेंडर आंमत्रित किए जाने की घोषणा की गई है। जिसके लिए टाउन प्लानर नियुक्त करने की बात भी बजट में कही गई है। ये कदम काफी सराहनीय हैं। सरकार को सबसे पहले अपने संसाधन बढ़ाने चाहिए।

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